विस्तृत उत्तर
जलंधर के वध के लिए वृंदा के सतीत्व को भंग करना अनिवार्य था। इसके लिए भगवान विष्णु ने एक कठिन किंतु आवश्यक लीला रची।
लीला — भगवान विष्णु ने ऋषि का वेश धारण कर उस वन में प्रवेश किया जहाँ वृंदा एकाकी भ्रमण कर रही थीं। विष्णु के साथ दो मायावी राक्षस थे जिन्हें देखकर वृंदा भयभीत हो गईं। ऋषि वेशधारी विष्णु ने उन राक्षसों को क्षणभर में भस्म कर दिया। वृंदा प्रभावित हुईं और उन्होंने अपने पति जलंधर के बारे में पूछा।
छल — भगवान विष्णु ने माया से जलंधर का सिर और धड़ प्रकट किया जिसे देखकर वृंदा मूर्छित हो गईं। होश आने पर उन्होंने जलंधर को जीवित करने की विनती की। भगवान विष्णु ने माया से जलंधर का सिर और धड़ जोड़कर उस शरीर में स्वयं प्रवेश कर लिया।
फल — वृंदा को इस छल का आभास नहीं हुआ और वह जलंधर-रूपी भगवान के प्रति पतिव्रता का व्यवहार करने लगी। उसी क्षण उनका सतीत्व भंग हो गया और तत्काल कैलाश पर युद्ध में भगवान शिव ने जलंधर का वध कर दिया।





