विस्तृत उत्तर
देवी भागवत पुराण में वर्णित यह मंत्र माता पार्वती का ध्यान और प्रणाम मंत्र है:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल करने वाली हो, शिव रूपा हो, सभी सिद्धियों को देने वाली हो, शरण में आए हुए की रक्षा करने वाली हो और तीन नेत्रों वाली गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है।
देवी भागवत पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि भगवान विष्णु स्वयं ब्रह्मा जी को इस रहस्यमय 'त्र्यम्बके गौरी' मंत्र का उपदेश देते हैं। विष्णु बताते हैं कि इसी आदिशक्ति जगदम्बा की कृपा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश सृष्टि का संचालन करने में सक्षम हैं।





