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पुराण परिचय📜 श्रीमद्देवी भागवत पुराण — 12 स्कंध; वेदव्यास रचित3 मिनट पठन

देवी भागवत क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

देवी भागवत पुराण वेदव्यास रचित 18,000 श्लोक, 12 स्कंधों का ग्रंथ है। इसमें आदि शक्ति महामाया का माहात्म्य, देवी गीता (शाक्त दर्शन), दुर्गा-महिषासुर युद्ध, 108 शक्तिपीठ और नवदुर्गा उपासना का वर्णन है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष पुण्यकारी है।

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विस्तृत उत्तर

श्रीमद्देवी भागवत पुराण का परिचय और महत्व स्वयं इस ग्रंथ के प्रारंभिक अध्यायों में वर्णित है:

देवी भागवत का परिचय

  • पूर्ण नाम: श्रीमद्देवी भागवत पुराण
  • रचनाकार: महर्षि वेदव्यास
  • स्कंध (खंड): 12
  • अध्याय: 318
  • श्लोक: 18,000
  • केंद्रीय शक्ति: आदि शक्ति — महामाया भगवती

देवी भागवत और श्रीमद्भागवत — अंतर

शाक्त परंपरा में देवी भागवत को 'महापुराण' और विष्णु भागवत को 'उपमहापुराण' मानती है। वैष्णव परंपरा इसका विपरीत मानती है। दोनों ही महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं।

12 स्कंधों का विषय

| स्कंध | विषय |

|--------|-------|

| 1-2 | ब्रह्मा और विष्णु को देवी द्वारा ज्ञान; माया रहस्य |

| 3 | देवी का विराट स्वरूप; विश्वरूप दर्शन |

| 4 | देवी और दानवों का युद्ध |

| 5 | विष्णु के अवतारों की कथाएं |

| 6 | दुर्गा-महिषासुर युद्ध; चंड-मुंड, शुंभ-निशुंभ वध |

| 7 | देवी गीता — भगवद्गीता की तरह देवी का ज्ञान |

| 8 | मनु वंशों का वर्णन |

| 9 | नवदुर्गा की उपासना; शक्तिपीठ |

| 10 | राम कथा — देवी की भूमिका |

| 11 | कृष्ण लीला — राधा-कृष्ण |

| 12 | देवी माहात्म्य; मोक्ष मार्ग |

देवी भागवत की अनूठी विशेषताएं

1देवी गीता (सातवाँ स्कंध)

भगवद्गीता की भाँति देवी ने हिमालय को ज्ञान दिया — आत्मज्ञान, माया, ब्रह्म और मोक्ष का मार्ग। यह शाक्त दर्शन का सर्वोत्तम ग्रंथ है।

2108 शक्तिपीठ

देवी भागवत में 108 शक्तिपीठों का वर्णन और उनकी महिमा है।

3देवी की सर्वोच्चता

इस पुराण में कहा गया है — 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म — और वह ब्रह्म स्त्रीरूपिणी शक्ति है।' देवी त्रिगुणमयी, सर्वव्यापी और सृष्टि की आधार हैं।

नवरात्रि और देवी भागवत

नवरात्रि में श्रीमद्देवी भागवत का पाठ अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। नौ दिनों में नौ स्कंधों का क्रमिक पाठ परंपरा में प्रचलित है।

देवी भागवत का दार्शनिक योगदान

> 'त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका।

> सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिता।' (देवी माहात्म्य)

— हे देवी! तुम ही स्वाहा, स्वधा, वषट्कार और सुधा हो। तुम ही अक्षर, नित्य और त्रिगुणमयी हो।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीमद्देवी भागवत पुराण — 12 स्कंध; वेदव्यास रचित
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