विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण से ली गई है।
विस्तृत परिचय
स्रोत: मार्कंडेय पुराण
- ▸यह 18 महापुराणों में से एक है
- ▸मार्कंडेय पुराण के अध्याय 81 से 93 — इन्हीं 13 अध्यायों को अलग ग्रंथ के रूप में 'दुर्गा सप्तशती' या 'देवी महात्म्यम्' कहा जाता है
मार्कंडेय पुराण का परिचय
- ▸रचयिता: ऋषि मार्कंडेय (स्वयं वर्णनकर्ता)
- ▸वक्ता: ऋषि जैमिनि को
- ▸कुल श्लोक: लगभग 9,000
- ▸विशेषता: यही एकमात्र महापुराण है जो शाक्त (देवी) परंपरा का सर्वोच्च ग्रंथ है
कथा का ढांचा
मार्कंडेय पुराण में ऋषि मार्कंडेय, ऋषि क्रौष्टुकि को तीन कथाएं सुनाते हैं:
- 1सुरथ राजा और वैश्य की कथा
- 2इनके द्वारा ऋषि मेधा से देवी महात्म्य सुनना
- 3देवी के तीन चरित्र — महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती
देवी महात्म्यम् के अन्य नाम
- ▸दुर्गा सप्तशती (उत्तर भारत)
- ▸चंडी (बंगाल, उड़ीसा)
- ▸देवी महात्म्यम् (दक्षिण भारत, केरल)
- ▸चंडी पाठ (महाराष्ट्र, गुजरात)
प्राचीनता
विद्वानों के अनुसार मार्कंडेय पुराण की रचना लगभग 400-600 ई. के बीच हुई। यह भारत के सबसे प्राचीन शाक्त ग्रंथों में से एक है।





