गरुड़ पुराण के अल्पज्ञात मंत्र
(संजीवनी एवं दारिद्र्यनाशक)
मंत्र संग्रह
संजीवनी मंत्र: यक्षि ओम उं स्वाहा
दारिद्र्य नाशक मंत्र: ॐ जूं स:
देवता
यक्षिणी (संजीवनी मंत्र हेतु), भगवान विष्णु (गरुड़ पुराण के अधिष्ठाता एवं दारिद्र्य नाशक मंत्र हेतु)।
स्रोत
गरुड़ पुराण।
प्रयोजन
संजीवनी मंत्र, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित करने की क्षमता वाला माना जाता है (इसका प्रयोग अत्यंत सावधानी, योग्यता और गुरु मार्गदर्शन में ही संभव है, अन्यथा यह निष्फल या हानिकारक हो सकता है)। दारिद्र्य नाशक मंत्र गरीबी और दुर्भाग्य को दूर कर धन-समृद्धि प्रदान करता है।
विधि
संजीवनी मंत्र को सिद्ध करने और प्रयोग करने के विशिष्ट नियम हैं, जिनका पालन किसी सिद्ध पुरुष के सानिध्य में ही करना चाहिए। इसका प्रयोग जगत कल्याण के लिए ही होना चाहिए । दारिद्र्य नाशक मंत्र (ॐ जूं स:) का यदि छह माह तक नियमित पाठ किया जाए तो जीवन से धन-संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी अत्यंत लाभकारी बताया गया है।
महत्व
गरुड़ पुराण को सामान्यतः मृत्यु उपरांत संस्कारों और कर्मों से सम्बंधित ग्रंथ माना जाता है। तथापि, इसमें जीवन की विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अनेक गूढ़ मंत्र और उपाय वर्णित हैं। संजीवनी मंत्र जैसे उल्लेख इसे अत्यंत रहस्यमय और महत्वपूर्ण बनाते हैं, हालाँकि ऐसे मंत्रों की साधना और सिद्धि अत्यंत कठिन और विरले ही संभव है। दारिद्र्य नाशक बीज मंत्र अपनी सरलता और प्रभावकारिता के कारण विशेष है, पर गरुड़ पुराण से सम्बंधित होने के कारण यह विशिष्टता रखता है।




