विस्तृत उत्तर
शिव पुराण 18 महापुराणों में से एक है और इसे शैव सम्प्रदाय का सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है।
परिचय
- ▸श्लोक संख्या: 24,000 श्लोक (कुछ मतानुसार 12,000)
- ▸रचयिता: वेदव्यास जी
- ▸वक्ता: सूत जी (शौनकादि ऋषियों को)
- ▸भाषा: संस्कृत
सात संहिताएं
- 1विद्येश्वर संहिता — शिव पूजा विधि, ओंकार, लिंग का महत्व
- 2रुद्र संहिता — शिव का जीवन चरित्र, सती, पार्वती विवाह, रावण कथा
- 3शतरुद्र संहिता — 100 रुद्रों का वर्णन
- 4कोटिरुद्र संहिता — 12 ज्योतिर्लिंगों का माहात्म्य
- 5उमा संहिता — पार्वती चरित्र, व्रत, उत्सव
- 6कैलाश संहिता — शिव के कैलाश स्वरूप का वर्णन
- 7वायवीय संहिता — ज्ञान, योग, मोक्ष मार्ग
शिव पुराण का महत्व
- ▸12 ज्योतिर्लिंगों की कथाएं
- ▸शिव-पार्वती विवाह की पूर्ण कथा
- ▸सती दाह और उमा अवतार की कथा
- ▸महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत की विधि
- ▸पंचाक्षरी मंत्र का माहात्म्य
पाठ का फल: शिव पुराण में कहा गया है — जो इस पुराण को श्रद्धा से पढ़ता या सुनता है, वह शिव लोक को प्राप्त होता है।



