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मंत्र और स्तुति प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

मंत्र और स्तुति से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

गौरी-शंकर साधना से क्या लाभ होता है?

गौरी-शंकर साधना के लाभ: शीघ्र विवाह, दांपत्य सौभाग्य और गृह क्लेश की शांति। शास्त्र: विवाह कारक शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं और पति-पत्नी के बीच आंतरिक शिव-शक्ति ऊर्जा का संतुलन स्थापित होता है।

गौरी शंकर साधनाविवाहदांपत्य सौभाग्य
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माँ पार्वती के पंचाक्षर और अष्टाक्षर मंत्र क्या हैं?

पंचाक्षर: 'ॐ पार्वत्यै नमः'; अष्टाक्षर: 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' — दोनों अत्यंत कल्याणकारी। महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...) भी शिव-शक्ति की संयुक्त उपासना का रूप है।

पंचाक्षर मंत्रअष्टाक्षर मंत्रॐ पार्वत्यै
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'सर्वमंगल मांगल्ये' मंत्र का क्या अर्थ है?

'सर्वमंगल मांगल्ये...' = हे नारायणी! तुम सब मंगल करने वाली, शिव रूपा, सभी सिद्धियाँ देने वाली, शरण की रक्षक, तीन नेत्रों वाली गौरी हो — तुम्हें नमस्कार। विष्णु ने ब्रह्मा को उपदेश दिया: इसी आदिशक्ति की कृपा से त्रिदेव सृष्टि संचालन करते हैं।

सर्वमंगल मांगल्येत्र्यम्बके गौरीनारायणी
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मंत्र और स्तुति — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर मंत्र और स्तुति श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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मंत्र और स्तुति को गहराई से समझने का तरीका

मंत्र और स्तुति प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।