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तिथि नियम प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

तिथि नियम से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

सुहागिन महिलाओं (मातृ नवमी) और सन्यासियों (द्वादशी) का श्राद्ध कब होता है?

जो महिलाएं सुहागिन (पति के रहते) मृत्यु को प्राप्त हुई हों, उनका श्राद्ध 'नवमी' तिथि (मातृ नवमी) को और सन्यासियों व साधुओं का श्राद्ध 'द्वादशी' (12वीं) तिथि को होता है।

मातृ नवमीद्वादशी श्राद्धसौभाग्यवती श्राद्ध
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अगर पूर्वजों की मृत्यु की तिथि (तारीख) याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

अगर आपको अपने माता-पिता या पूर्वजों की मृत्यु की तारीख (तिथि) बिल्कुल याद नहीं है, तो पितृ पक्ष के आखिरी दिन यानी 'सर्वपितृ अमावस्या' को उनका श्राद्ध करना चाहिए।

सर्वपितृ अमावस्याअज्ञात तिथिमहालय अमावस्या
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अकाल मृत्यु (दुर्घटना, आत्महत्या) वालों का श्राद्ध किस दिन (चतुर्दशी) करना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार दुर्घटना, जहर, आग, डूबने या आत्महत्या जैसी अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध केवल पितृ पक्ष की 'चतुर्दशी' (14वीं तिथि) को ही करना चाहिए।

चतुर्दशी श्राद्धअकाल मृत्युतिथि नियम
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तिथि नियम — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तिथि नियम श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

तिथि नियम को गहराई से समझने का तरीका

तिथि नियम प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।