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शिव नाम महिमा प्रश्नोत्तर — 10 प्रश्न

शिव नाम महिमा से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 10 प्रश्न

शिव को शंभू क्यों कहते हैं

शंभू = 'शं' (शुभ, कल्याण) + 'भू' (स्वरूप) = आनंद-स्वरूप, कल्याण के साकार रूप। शिव स्वयं परमानंद हैं और भक्तों को भी आनंद देते हैं — इसीलिए 'शंभू'। वे अनंत, अनादि और सृष्टि के संचालक हैं।

शंभूआनंद स्वरूपकल्याण
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शिव को उमापति क्यों कहते हैं

उमापति = उमा (पार्वती) के पति। 'उमा' नाम उनकी माँ द्वारा 'उ! मा!' कहने से पड़ा। यह नाम शिव के गृहस्थ, प्रेमपूर्ण और परम-भक्त-वत्सल स्वरूप को दर्शाता है। एक ओर महायोगी, दूसरी ओर उमा के परम प्रेमी।

उमापतिपार्वती पतिशिव नाम
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शिव को रुद्र क्यों कहते हैं

रुद्र = 'रुत्' (दुख) + 'द्र' (हरने वाला) — दुखों को हरने वाले देव। यह शिव का वेदों में मूल नाम है। यजुर्वेद के रुद्रम् में 'नमस्ते रुद्र मन्यव' से इनका स्तवन है। रुद्र सौम्य और उग्र — दोनों स्वरूपों में विराजते हैं।

रुद्रदुख हरणवेद नाम
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शिव को आशुतोष क्यों कहते हैं

आशुतोष = शीघ्र प्रसन्न होने वाले। एक बेलपत्र, एक लोटा जल — इतने से संतुष्ट हो जाते हैं। रावण-भस्मासुर जैसों को भी वरदान दिया। 'ॐ आशुतोषाय नमः' इनकी शीघ्र कृपा के लिए मंत्र है।

आशुतोषशीघ्र प्रसन्नभक्त वत्सल
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शिव को पशुपति क्यों कहते हैं

पशुपति = जीवात्माओं के स्वामी। 'पशु' = माया-बंधन में जकड़ी आत्मा, 'पति' = उस बंधन से मुक्त कराने वाले स्वामी। शिव समस्त जीव-जगत और बद्ध आत्माओं के रक्षक-मुक्तिदाता हैं। यजुर्वेद के रुद्रम् में इसका उल्लेख है।

पशुपतिपशुपतिनाथजीव स्वामी
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शिव को त्रिलोचन क्यों कहते हैं

त्रिलोचन = तीन नेत्रों वाले। दायाँ = सूर्य, बायाँ = चंद्र, तृतीय = अग्नि (दिव्य ज्ञान)। तृतीय नेत्र घोर अधर्म पर खुलता है — कामदेव को भस्म किया। यह आज्ञा-चक्र और परम ज्ञान का प्रतीक है।

त्रिलोचनतीसरा नेत्रतृतीय नयन
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शिव को महाकाल क्यों कहा जाता है

महाकाल = समय के महान अधिपति। शिव समस्त काल-चक्र के स्वामी हैं — जन्म से मृत्यु तक सब उनके अधीन है। वे मृत्युंजय भी हैं — मृत्यु को भी जीतने वाले। उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी रूप का प्रतीक है।

महाकालकालसमय
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शिव को भोलेनाथ क्यों कहते हैं

भोलेनाथ = सरल, निष्कपट और सहजता से प्रसन्न होने वाले प्रभु। एक लोटा जल और बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। रावण-भस्मासुर जैसे असुरों को भी वरदान दिया। यही उनकी भोली प्रकृति है।

भोलेनाथआशुतोषशिव सरलता
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शिव को नीलकंठ क्यों कहते हैं

समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने संसार की रक्षा के लिए पी लिया। पार्वती ने कंठ पकड़ा जिससे विष नीचे नहीं उतरा — कंठ नीला हो गया। इसीलिए शिव 'नीलकंठ' कहलाए।

नीलकंठसमुद्र मंथनहलाहल विष
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भगवान शिव को महादेव क्यों कहा जाता है

महादेव = 'महान देव' — सभी देवताओं में श्रेष्ठ। शिव संहार के अधिपति हैं जो सृष्टि का सबसे शक्तिशाली कार्य है। सभी से समदृष्टि रखते हैं — देव, दानव, साधु, भक्त — सब पर समान कृपा। इसीलिए वे 'देवों के देव महादेव' हैं।

महादेवशिव नामदेवाधिदेव
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शिव नाम महिमा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव नाम महिमा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शिव नाम महिमा को गहराई से समझने का तरीका

शिव नाम महिमा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।