विस्तृत उत्तर
पशुपति' का अर्थ है — पशुओं के स्वामी। शिव पुराण और वेदों में इस नाम की विस्तृत व्याख्या है।
पशुपति का व्यापक अर्थ — यहाँ 'पशु' केवल चौपाये प्राणियों का नहीं, बल्कि संपूर्ण जीव-जगत का वाचक है। वेद में 'पशु' शब्द बंधन में जकड़े जीव (आत्मा) के लिए प्रयुक्त है। 'भगवान शिव को पशुपति इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह पशु-पक्षियों और जीवात्माओं के स्वामी हैं।'
पाशुपत दर्शन — पशु = माया के बंधन में जकड़ी आत्मा; पति = उस आत्मा का स्वामी। इस प्रकार शिव समस्त बद्ध जीवों के मुक्तिदाता हैं। जो शिव की शरण में आता है, शिव उसे माया-बंधन से मुक्त करते हैं।
नेपाल में पशुपतिनाथ — काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में शिव पशुपति रूप में पूजित हैं। यह नेपाल का सर्वाधिक पवित्र मंदिर है।
यजुर्वेद में — रुद्रम् में शिव को 'पशुपते' कहकर संबोधित किया गया है — 'नमस्ते रुद्र मन्यव... पशूनां पतये नमः।'





