विस्तृत उत्तर
शिव का नागों को आभूषण के रूप में धारण करना यह दर्शाता है कि जो 'बंधन' (पाश) सामान्य जीव को बाँधता है, वह शिव के पूर्ण 'नियंत्रण' में है।
जो 'नाग-पाश' सामान्य जीव (पशु) को बाँधकर कालसर्प दोष देता है, वही 'नाग' भगवान 'पशुपति' (शिव) के लिए 'आभूषण' हैं।
इसीलिए नाग-साधना में ध्यान सदैव 'शिव-आभूषण' (शिवलिंग पर लिपटे हुए नाग) के रूप में करने का निर्देश है।





