शिव महिमाशिव जी के गले में जो सर्प है वह वासुकी है या शेषनाग?शिव जी के गले में लिपटे सर्प का नाम वासुकी है, न कि शेषनाग। शेषनाग भगवान विष्णु के सर्प हैं। वासुकी नागों के राजा और शिव के परम भक्त हैं, जिन्हें समुद्र मंथन में भाग लेने के बाद शिव ने गले में स्थान दिया।#वासुकी#शेषनाग#शिव नाग
शिव महिमाशिव जी के गले में सर्प क्यों होता है?शिव जी के गले में नागराज वासुकी इसलिए हैं क्योंकि वासुकी उनके परम भक्त थे और समुद्र मंथन में रस्सी बनकर घायल हुए। इस भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अपने गले में आभूषण की तरह सदा रहने का वरदान दिया।
नाग गायत्री और बीज मंत्रवासुकि गायत्री मंत्र क्या है?वासुकि गायत्री मंत्र: 'ॐ सर्पराजाय विद्महे, पद्म हस्ताय धीमहि, तन्नो वासुकि प्रचोदयात्' — यह शिव के नाग वासुकि की शक्ति को साधक में प्रतिष्ठित करता है।#वासुकि गायत्री#नाग मंत्र#शिव नाग
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांतशिव के गले में नाग क्यों होते हैं?शिव के गले में नाग इसलिए हैं क्योंकि जो बंधन (पाश) सामान्य जीव को बाँधता है, वह शिव के पूर्ण नियंत्रण में है — नाग शिव के आभूषण हैं, भय का कारण नहीं।#शिव नाग#आभूषण#पशुपति