विस्तृत उत्तर
यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके बारे में कभी-कभी भ्रम होता है। शिव पुराण और अधिकांश पुराणों के अनुसार भगवान शिव के गले में लिपटे नाग का नाम 'वासुकी' है, न कि शेषनाग।
शेषनाग (जिन्हें अनंत भी कहते हैं) भगवान विष्णु के शैय्या-सर्प हैं — वे क्षीरसागर में भगवान विष्णु को शयन कराते हैं। शेषनाग और वासुकी दोनों नागराज हैं, परंतु उनके देवों से संबंध अलग-अलग हैं।
वासुकी नागों के राजा हैं और भगवान शिव के परम भक्त हैं। कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी कद्रू के पुत्रों में अनंत (शेषनाग) सबसे पहले नागों के राजा हुए, फिर वासुकी राजा बने। वासुकी का निवास हिमालय के कैलाश क्षेत्र के समीप माना गया है, जो शिव जी का ही क्षेत्र है। समुद्र मंथन में वासुकी ने रस्सी का काम किया और इसी भक्ति के फलस्वरूप शिव जी ने उन्हें अपने गले में स्थान दिया।
शिव पुराण में स्पष्ट रूप से वासुकी को ही शिव के गले का नाग बताया गया है। जिस प्रकार शेषनाग का संबंध विष्णु से है, उसी प्रकार वासुकी का संबंध शिव से है।





