विस्तृत उत्तर
तारकासुर के तीनों पुत्रों ने ब्रह्माजी से एक अत्यंत चतुर और दुर्लभ वरदान माँगा जिससे उनकी मृत्यु लगभग असंभव हो गई।
शिव पुराण के अनुसार उन्होंने ब्रह्माजी से निवेदन किया — 'प्रभो! आप हमारे लिए तीन ऐसे नगरों का निर्माण करें जो क्रमशः सोने, चाँदी और लोहे से बने हों और आकाश में विचरण करते रहें। ये तीनों नगर हजार वर्षों में एक बार अभिजित नक्षत्र में एक पंक्ति में आएं। उस समय जो शांतचित्त व्यक्ति एक असंभव रथ पर बैठकर एक ही बाण से तीनों नगरों को एक साथ नष्ट करे, तभी हमारी मृत्यु हो।'
ब्रह्माजी ने 'तथास्तु' कहा। इस वरदान के अनुसार नगरों का निर्माण कराया गया — पुराणों में मय दानव (कहीं विश्वकर्मा का भी उल्लेख मिलता है) से तारकाक्ष के लिए स्वर्णपुरी (सोने की नगरी), कमलाक्ष के लिए रजतपुरी (चाँदी की नगरी) और विद्युन्माली के लिए लौहपुरी (लोहे की नगरी) बनवाई गई।
ये तीनों नगर आकाश में घूमते रहते थे और इनमें रहते हुए तीनों असुरों ने सातों लोकों में आतंक मचाया, देवताओं को उनके लोकों से बाहर निकाल दिया और समस्त सृष्टि को संकटग्रस्त कर दिया।




