ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय
परिचय:
यह एक अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र है, जो भगवान शिव और पराशक्ति दोनों का आह्वान करता है। इसमें "ह्रीं" माया/शक्ति का बीज मंत्र है और "ह्रौं" शिव का बीज मंत्र है। इन बीज अक्षरों का संयोजन इस मंत्र को "ॐ नमः शिवाय" का एक अधिक गूढ़ और संभवतः तांत्रिक साधनाओं के लिए उपयुक्त रूप प्रदान करता है।
लाभ:
इस मंत्र के जाप से शीघ्र संपत्ति, सौभाग्य और सफलता की प्राप्ति होती है। कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और बिगड़े हुए काम भी बनने लगते हैं। इसके अतिरिक्त, घर में सुख-शांति और धन की कामना के लिए भी यह मंत्र अत्यंत प्रभावी है!
जाप विधि:
इस मंत्र का प्रतिदिन 21 या 108 बार जाप करना श्रेयस्कर माना गया है। जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना चाहिए। साधक को पूर्व दिशा की ओर मुख करके, आसन पर बैठकर, धूप-दीपक जलाकर और संकल्प लेकर मंत्र जाप करना चाहिए।
स्रोत:
यद्यपि किसी एक विशिष्ट पुराण का नाम सीधे तौर पर सभी उपलब्ध संदर्भों में स्पष्ट नहीं है, इसे "वेद शास्त्रों" से सम्बंधित और "मंत्र शास्त्र" का एक महत्वपूर्ण मंत्र माना गया है। मन्त्रमहोदधि जैसे प्राचीन तंत्र ग्रंथ में इसका उल्लेख मिलता है, और इसे त्रैवर्णिकों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) को ही देने योग्य मंत्रों में गिना गया है। इसका उल्लेख विशिष्ट तंत्र ग्रंथों में होना इसे सामान्य साधकों के लिए अल्पज्ञात बनाता है।
