विस्तृत उत्तर
देवताओं ने शिव से विष पीने का अनुरोध इसलिए किया क्योंकि वे जानते थे कि केवल भगवान शिव ही उस महाविष को धारण करने में सक्षम हैं।
हलाहल विष जब समुद्र से निकला, तो उसकी ज्वाला से सम्पूर्ण सृष्टि — देव, दानव, मनुष्य सभी — संकट में पड़ गए। यह विष इतना प्राणघातक था कि न इंद्र, न विष्णु, न ब्रह्मा, कोई भी इसे ग्रहण करने का साहस नहीं जुटा सके। यदि विष धरती पर फैल जाता तो समस्त सृष्टि का विनाश हो जाता।
ऐसे संकट में देवता शिव की शरण में इसलिए गए क्योंकि — पहला, शिव 'महाकाल' हैं, काल के भी काल। विष तो काल का ही एक रूप है और काल को शिव ने अपने वश में किया हुआ है। दूसरा, शिव योगेश्वर हैं और उनकी योगशक्ति इतनी प्रचंड है कि वे विष की ऊष्मा को अपने ध्यानबल से नियंत्रित कर सकते हैं। तीसरा, शिव विरक्त हैं — विष-अमृत दोनों उनके लिए समान हैं — वे न तो मृत्यु से डरते हैं और न जीवन से आसक्त हैं। चौथा, शिव त्रिलोकनाथ हैं और सम्पूर्ण सृष्टि उन्हीं में समाहित है — इसलिए वे ही उसकी रक्षा कर सकते थे।
देवताओं की करुण पुकार सुनकर शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए वह विष पिया। यह उनके महादेव होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।





