विस्तृत उत्तर
दक्ष द्वारा शिव और सती को यज्ञ में न बुलाने के पीछे उनका पुराना क्रोध और अहंकार था।
शिव पुराण और अन्य पुराणों के अनुसार दक्ष को कई कारणों से शिव के प्रति पहले से ही रोष था। सती ने दक्ष की इच्छा के विरुद्ध शिव को अपना पति चुना था — इससे दक्ष को लगा कि शिव ने उनकी पुत्री को प्रभावित किया और उनका अपमान किया। उस पर से एक पूर्व के यज्ञ में जब समस्त देवता दक्ष के सम्मान में खड़े हुए, परंतु शिव ब्रह्मा जी के साथ बैठे रहे। दक्ष ने इसे अपना घोर अपमान समझा और शिव को यज्ञभाग से वंचित करने का शाप दे दिया था। दक्ष शिव की जीवन-शैली — श्मशानवास, भस्म, जटा, नागों का धारण — से भी सहमत नहीं थे और उन्हें देवतागण की श्रेणी में योग्य नहीं मानते थे।
इन सभी पुराने बैर के कारण जब दक्ष ने कनखल में विशाल यज्ञ का आयोजन किया, तो उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य सभी देवताओं, ऋषियों को आमंत्रित किया, परंतु जानबूझकर शिव और सती को नहीं बुलाया। यह एक सोची-समझी प्रतिशोध की भावना थी। शिव जी ने पहले ही सती को समझाया था कि बिना बुलाए पिता के घर भी नहीं जाना चाहिए, परंतु सती नहीं मानीं।





