विस्तृत उत्तर
लिंग पुराण, शिव पुराण और अन्य शैव ग्रंथों के अनुसार शिव केवल कैलाश पर नहीं रहते, बल्कि वे ब्रह्मांड के आठ मूल तत्त्वों में व्याप्त हैं। भारतीय मनीषियों ने इन अष्टमूर्तियों की अवधारणा के माध्यम से महादेव की सर्वव्यापकता का उद्घोष किया है। शिव पुराण के अनुसार, इन अष्टमूर्तियों की पूजा के बिना शिव की आराधना निष्फल मानी जाती है।
शिव की आठ मूर्तियाँ हैं:
१. शर्व — क्षिति (पृथ्वी तत्त्व)
२. भव — जल तत्त्व
३. रुद्र — अग्नि (तेजोमय तत्त्व)
४. उग्र — वायु तत्त्व
५. भीम — आकाश तत्त्व
६. महादेव — सूर्य रूप
७. सोमनाथ — चंद्र रूप
८. पशुपति — यजमान (जीव या आत्मा)
अष्टमूर्ति का यह महान सिद्धांत यह सिद्ध करता है कि संपूर्ण प्रकृति — पंचभूत, सूर्य, चंद्र और यहाँ तक कि उपासना करने वाला जीव (यजमान) — स्वयं शिव का ही साक्षात विस्तार है।





