विस्तृत उत्तर
शर्व — क्षिति (पृथ्वी तत्त्व): प्रसिद्ध प्रतीक एवं पावन तीर्थ है एकाम्रेश्वर शिवलिंग (कांचीपुरम, जहाँ शिव पृथ्वी तत्त्व में पूजे जाते हैं)।
'शर्व' (पृथ्वी तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है को संदर्भ सहित समझें
'शर्व' (पृथ्वी तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: 'शर्व' = पृथ्वी तत्त्व में शिव। प्रसिद्ध तीर्थ: एकाम्रेश्वर शिवलिंग — कांचीपुरम, जहाँ शिव पृथ्वी तत्त्व रूप में पूजे जाते हैं।
अष्टमूर्ति जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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शिव का 'सोऽहं' सिद्धांत क्या है?
शिव का श्लोक: 'अहं शिवः...सर्व शिवमयं ब्रह्म शिवात पर न किंचन।' अर्थ: मैं शिव, तुम शिव, सब कुछ शिवमय। संपूर्ण प्रकृति (पंचभूत, सूर्य, चंद्र, जीव) शिव का ही विस्तार है। 'सोऽहं' = मैं ही शिव हूँ — अद्वैत ज्ञान।
'पशुपति' स्वरूप का क्या महत्व है?
'पशुपति' = जीव/यजमान रूप में शिव। तीर्थ: पशुपतिनाथ (नेपाल)। 'पशु' = माया के पाश में बंधा जीव। 'पशुपति' शिव इस जीव का उद्धार कर 'सोऽहं' (मैं ही ब्रह्म हूँ) के ज्ञान तक ले जाते हैं।
'भीम' (आकाश तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है?
'भीम' = आकाश तत्त्व में शिव। प्रसिद्ध तीर्थ: चिदंबरम — नटराज मंदिर, जहाँ नीला शून्याकर आकाश तत्त्व रूप में है।
'भव' (जल तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है?
'भव' = जल तत्त्व में शिव। प्रसिद्ध तीर्थ: जम्बूकेश्वर शिवलिंग — त्रिचनापल्ली, जहाँ शिवलिंग से निरंतर जल आता है।
शिव की अष्टमूर्ति क्या है?
अष्टमूर्ति = शिव आठ मूल तत्त्वों में व्याप्त: शर्व (पृथ्वी), भव (जल), रुद्र (अग्नि), उग्र (वायु), भीम (आकाश), महादेव (सूर्य), सोमनाथ (चंद्र), पशुपति (जीव/आत्मा)। शिव पुराण: इनकी पूजा के बिना शिव की आराधना निष्फल।
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