ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

अष्टमूर्ति प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

अष्टमूर्ति से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

शिव का 'सोऽहं' सिद्धांत क्या है?

शिव का श्लोक: 'अहं शिवः...सर्व शिवमयं ब्रह्म शिवात पर न किंचन।' अर्थ: मैं शिव, तुम शिव, सब कुछ शिवमय। संपूर्ण प्रकृति (पंचभूत, सूर्य, चंद्र, जीव) शिव का ही विस्तार है। 'सोऽहं' = मैं ही शिव हूँ — अद्वैत ज्ञान।

सोऽहंमैं शिव हूँअद्वैत ज्ञान
पूरा उत्तर पढ़ें →

'पशुपति' स्वरूप का क्या महत्व है?

'पशुपति' = जीव/यजमान रूप में शिव। तीर्थ: पशुपतिनाथ (नेपाल)। 'पशु' = माया के पाश में बंधा जीव। 'पशुपति' शिव इस जीव का उद्धार कर 'सोऽहं' (मैं ही ब्रह्म हूँ) के ज्ञान तक ले जाते हैं।

पशुपतिपशुपतिनाथजीव उद्धार
पूरा उत्तर पढ़ें →

'भीम' (आकाश तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है?

'भीम' = आकाश तत्त्व में शिव। प्रसिद्ध तीर्थ: चिदंबरम — नटराज मंदिर, जहाँ नीला शून्याकर आकाश तत्त्व रूप में है।

भीमआकाश तत्त्वचिदंबरम
पूरा उत्तर पढ़ें →

'भव' (जल तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है?

'भव' = जल तत्त्व में शिव। प्रसिद्ध तीर्थ: जम्बूकेश्वर शिवलिंग — त्रिचनापल्ली, जहाँ शिवलिंग से निरंतर जल आता है।

भवजल तत्त्वजम्बूकेश्वर
पूरा उत्तर पढ़ें →

'शर्व' (पृथ्वी तत्त्व) स्वरूप का क्या प्रसिद्ध तीर्थ है?

'शर्व' = पृथ्वी तत्त्व में शिव। प्रसिद्ध तीर्थ: एकाम्रेश्वर शिवलिंग — कांचीपुरम, जहाँ शिव पृथ्वी तत्त्व रूप में पूजे जाते हैं।

शर्वपृथ्वी तत्त्वएकाम्रेश्वर
पूरा उत्तर पढ़ें →

शिव की अष्टमूर्ति क्या है?

अष्टमूर्ति = शिव आठ मूल तत्त्वों में व्याप्त: शर्व (पृथ्वी), भव (जल), रुद्र (अग्नि), उग्र (वायु), भीम (आकाश), महादेव (सूर्य), सोमनाथ (चंद्र), पशुपति (जीव/आत्मा)। शिव पुराण: इनकी पूजा के बिना शिव की आराधना निष्फल।

अष्टमूर्तिआठ तत्त्वसर्वव्यापकता
पूरा उत्तर पढ़ें →

अष्टमूर्ति — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर अष्टमूर्ति श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

अष्टमूर्ति को गहराई से समझने का तरीका

अष्टमूर्ति प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।