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व्रत एवं त्योहार प्रश्नोत्तर — 20 प्रश्न

व्रत एवं त्योहार से जुड़े 20 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 20 प्रश्न

रामनवमी पर व्रत कैसे रखें?

रामनवमी व्रत में प्रातः स्नान, सूर्य को अर्घ्य, संकल्प और दोपहर को श्रीराम की विशेष पूजा करें। अन्न का त्याग कर फलाहार करें। रामरक्षास्तोत्र और रामचरितमानस का पाठ करें।

रामनवमीव्रत विधिचैत्र नवमी
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विश्वकर्मा पूजा कब और कैसे होती है?

विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) को होती है। इस दिन मशीनों-औजारों की सफाई और पूजा की जाती है। प्रतिमा स्थापित कर पुष्प-धूप-दीप से पूजन और आरती होती है।

विश्वकर्मा पूजा17 सितंबरकन्या संक्रांति
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गोवर्धन पूजा में अन्नकूट क्या है?

अन्नकूट का अर्थ है 'अन्न का पर्वत।' गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन भूखे रहने के बाद ब्रजवासियों ने कृष्ण को 7 दिन × 8 पहर = 56 प्रकार के व्यंजन खिलाए — यही छप्पन भोग की परंपरा है। इसे अन्नकूट कहते हैं।

गोवर्धन पूजाअन्नकूट56 भोग
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भाई दूज क्यों मनाते हैं?

भाई दूज इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन के लिए गए थे। यमुना के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के हाथों तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं होगा।

भाई दूजयम द्वितीयायमराज
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नरक चतुर्दशी की कथा क्या है?

नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और 16 हजार बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी की खुशी में दीप जलाए गए और यह पर्व मनाया जाने लगा।

नरक चतुर्दशीनरकासुरकृष्ण
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धनतेरस पर सोना-चाँदी क्यों खरीदते हैं?

धनतेरस पर सोना-चाँदी इसलिए खरीदते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। सोना लक्ष्मी का प्रतीक है, और इस दिन धातु खरीदना लक्ष्मी-कुबेर-धन्वंतरि तीनों की कृपा का माध्यम माना जाता है।

धनतेरससोनाचाँदी
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दीपावली पर पाँच दिन कौन-कौन से त्योहार हैं?

दीपावली के पाँच दिन हैं: धनतेरस (धन्वंतरि पूजा), नरक चतुर्दशी (नरकासुर वध स्मृति), दीपावली (लक्ष्मी-गणेश पूजन), गोवर्धन पूजा (अन्नकूट), और भाई दूज (यम द्वितीया)।

दीपावलीधनतेरसनरक चतुर्दशी
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छठ पूजा में अर्घ्य देने की विधि क्या है?

छठ में दो अर्घ्य होते हैं — तीसरे दिन संध्या में डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को। बाँस के सूप में प्रसाद सजाकर, जल में खड़े होकर तांबे के लोटे से जल-दूध मिश्रित अर्घ्य दिया जाता है। 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र के साथ हाथ सिर के ऊपर रखकर सूर्य को अर्पण किया जाता है।

छठ पूजाअर्घ्यसूर्य उपासना
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अधिकमास में पूजा का क्या महत्व है?

अधिकमास में पूजा-जप-दान का फल दस गुना मिलता है क्योंकि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण इस मास के अधिपति हैं। विष्णु-कृष्ण पूजा, दीपदान, भागवत पाठ और तीर्थ यात्रा विशेष रूप से फलदायी हैं। मांगलिक कार्य वर्जित हैं लेकिन साधना के लिए यह मास सर्वश्रेष्ठ है।

अधिकमासपुरुषोत्तम मासमलमास
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श्रावण मास में क्या खाना वर्जित है?

श्रावण में मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, गोभी), प्याज-लहसुन, बैंगन, कच्चा दूध-दही, कढ़ी और नशीले पदार्थ वर्जित हैं। शास्त्र और वैज्ञानिक दोनों आधार पर सात्विक भोजन का पालन करना इस मास का विशेष नियम है।

श्रावणसावनवर्जित भोजन
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करवाचौथ व्रत पहली बार कैसे करें?

सूर्योदय से पहले सरगी लें। सोलह श्रृंगार करें। शाम को करवाचौथ माता की पूजा, कथा श्रवण और करवा बदलने की रस्म करें। रात को छलनी से चाँद और पति का मुख देखें, अर्घ्य दें और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।

करवाचौथपहली बार व्रतकरवाचौथ विधि
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करवाचौथ में चाँद देखने के बाद क्या करें?

चाँद उगने पर छलनी से पहले चंद्रमा देखें, फिर पति का मुख। करवे से चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें। पति के पैर छूएं, उनके हाथ से जल पिएं और प्रसाद ग्रहण करें — इससे व्रत का पारण होता है।

करवाचौथचाँद अर्घ्यव्रत पारण
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अहोई अष्टमी की कथा कौन सी है?

साहूकार की बहू के हाथों अनजाने में सेही का बच्चा मर गया, जिससे उसकी संतानें मरने लगीं। वृद्धाओं की सलाह पर उसने कार्तिक अष्टमी को सेही का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा और क्षमायाचना की। माता की कृपा से उसे फिर सात पुत्र मिले।

अहोई अष्टमी कथासेही की कथाव्रत कथा
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अहोई अष्टमी व्रत की विधि

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माताएं संतान की दीर्घायु के लिए रखती हैं। दीवार पर सेही का चित्र बनाएं, सायंकाल पूजा करें, कथा सुनें और तारे उगने पर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

अहोई अष्टमीव्रत विधिसंतान व्रत
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संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में अंतर

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी में रात्रि को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है, जो इसकी मुख्य विशेषता है। मंगलवार की संकष्टी को अंगारकी कहते हैं।

संकष्टी चतुर्थीविनायक चतुर्थीगणेश चतुर्थी
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गणेश चतुर्थी व्रत की विधि

गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। मूर्ति स्थापना, पंचामृत स्नान, दूर्वा, मोदक, लाल फूल, धूप-दीप, कथा और आरती मुख्य अंग हैं। इस दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित है।

गणेश चतुर्थीविनायक चतुर्थीगणपति पूजा
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हरतालिका तीज की कथा

माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। सखी ने उन्हें वन में छुपाया (हरतालिका = हरण + सखी)। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाकर जागरण किया और शिव ने प्रकट होकर उनकी कामना पूरी की। इसी घटना की स्मृति में यह व्रत होता है।

हरतालिका तीज कथापार्वती शिव कथातीज व्रत कथा
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हरतालिका तीज की पूजा सामग्री

हरतालिका तीज पूजा सामग्री में गीली मिट्टी (प्रतिमा के लिए), पंचामृत, केले के पत्ते, बेलपत्र, धूप-दीप, पान-सुपारी, नारियल, और माता पार्वती के लिए सिंदूर-चूड़ी-मेहंदी सहित सोलह श्रृंगार की वस्तुएं शामिल हैं।

हरतालिका तीजपूजा सामग्रीभाद्रपद तीज
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हरियाली तीज व्रत कैसे करें?

हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को होती है। सोलह श्रृंगार, हरे वस्त्र, प्रदोष काल में गणेश-शिव-पार्वती पूजा, कथा श्रवण, झूला और मेहंदी इसके मुख्य अंग हैं। निर्जला व्रत रखकर अगले दिन पारण करें।

हरियाली तीजश्रावणी तीजसावन तीज
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रामनवमी का प्रसाद क्या बनाते हैं?

रामनवमी पर मुख्यतः पंजीरी (घी, आटा, बूरा, सूखे मेवे), पंचामृत और काले चने का भोग बनाया जाता है। पंजीरी उत्तर भारत का सबसे पारंपरिक प्रसाद है। सभी भोग में तुलसी दल रखना अनिवार्य है।

रामनवमीप्रसादपंजीरी
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व्रत एवं त्योहार — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर व्रत एवं त्योहार श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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व्रत एवं त्योहार को गहराई से समझने का तरीका

व्रत एवं त्योहार प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

20 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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