विस्तृत उत्तर
करवाचौथ में चंद्रमा का दर्शन व्रत का सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण क्षण होता है। जब चंद्रमा उदय हो जाए तो निम्नलिखित क्रम से विधि संपन्न करें:
पहले छलनी से चंद्रमा देखें — छलनी से चाँद का दर्शन इसलिए किया जाता है क्योंकि मान्यता है कि छलनी के अनेक छेदों के कारण पति की आयु उतने ही गुना बढ़ जाती है। छलनी को चंद्रमा की ओर करके उसमें से चाँद को देखें।
फिर छलनी की ओट से पति का मुख देखें — यह प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें — मिट्टी के करवे में जल भरकर उसे चंद्रमा की दिशा में अर्पित करें। 'ॐ चतुर्थ चंद्राय नमः' या 'नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभम्' का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें।
पति के पैर छुएं और आशीर्वाद लें।
पति के हाथ से जल ग्रहण करें — पूरे दिन के निर्जला उपवास को पति के हाथ से दिया गया जल पीकर खोला जाता है। यह विवाह संबंध की पवित्रता और पारस्परिक प्रेम का प्रतीक है।
पति प्रसाद या कुछ मिठाई खिलाएं और व्रत का पारण हो जाता है।
इसके बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का चरण स्पर्श करें और उनसे आशीर्वाद लें।
करवे को किसी सुहागिन को दान दें या किसी योग्य ब्राह्मणी को दे दें।





