विस्तृत उत्तर
हिंदू पूजा-परंपरा में नमस्कार या प्रणाम के विभिन्न प्रकार शास्त्रों में वर्णित हैं। मुख्यतः शारीरिक अंगों की संख्या के आधार पर प्रणाम के कई भेद किए गए हैं:
एकांग नमस्कार — केवल मस्तक या सिर झुकाकर किया जाने वाला प्रणाम।
द्विअंग नमस्कार — दोनों हाथ जोड़कर सिर झुकाना।
त्र्यंग नमस्कार — दोनों हाथ और सिर एक साथ झुकाकर किया गया प्रणाम।
चतुरंग नमस्कार — दोनों हाथ और दोनों घुटने झुकाना।
पंचांग नमस्कार (पंचांग प्रणाम) — दोनों हाथ, दोनों घुटने और मस्तक — पाँच अंगों से किया गया प्रणाम। यह स्त्रियों के लिए उचित प्रणाम माना गया है।
साष्टांग नमस्कार (अष्टांग प्रणाम / दंडवत प्रणाम) — आठ अंगों से किया गया प्रणाम — दोनों पाँव, दोनों घुटने, छाती (वक्षस्थल), ठुड्डी (ठोड़ी), और दोनों हथेलियाँ। शास्त्रों में यह पुरुषों के लिए सर्वोत्तम प्रणाम माना गया है और षोडशोपचार पूजा में यह सोलहवाँ उपचार है।
इसके अलावा मानस प्रणाम (मन में भाव से किया प्रणाम) और वाचिक प्रणाम (स्तोत्र या नाम से किया वंदन) भी मान्य माने गए हैं। इस प्रकार शरीर, मन और वाणी तीनों से मिलकर पूर्ण प्रणाम होता है।





