विस्तृत उत्तर
कृष्ण पूजा में भक्तों से होने वाली प्रमुख गलतियाँ:
सबसे बड़ी गलती — केवल बाहरी आडंबर और विधि पर ध्यान देना, भाव भूल जाना। कृष्ण गीता में कहते हैं — 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति' — जो मुझे पत्ती, फूल, फल या जल भक्ति से देता है, मैं उसे ग्रहण करता हूँ। भाव के बिना बड़ी से बड़ी पूजा व्यर्थ है।
दूसरी गलती — प्रसाद पहले खुद खाना। भगवान को अर्पित करने से पहले भोजन का एक टुकड़ा भी न चखें। नैवेद्य का महत्व यही है कि पहले भगवान को अर्पित हो।
तीसरी गलती — तुलसी के बिना कृष्ण-पूजा। कृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
चौथी गलती — पूजा के बाद अनुचित व्यवहार। कृष्ण का पूजन करके झूठ बोलना, किसी को कष्ट देना — यह सबसे बड़ा पूजा-दोष है। पूजा का प्रभाव तभी मिलता है जब जीवन भी उसके अनुरूप हो।
पाँचवीं गलती — जन्माष्टमी पर केवल उत्सव मनाना, गीता न पढ़ना। जन्माष्टमी कृष्ण का जन्मोत्सव है — उस दिन गीता के एक अध्याय का पाठ सबसे उचित पूजा है।





