विस्तृत उत्तर
भगवान कृष्ण प्रेम के देव हैं। उन्हें सोने-चाँदी की पूजा से नहीं, शुद्ध प्रेम और भाव से प्रसन्न किया जा सकता है।
सबसे सरल उपाय:
पहला — माखन-मिश्री का भोग — गोपाल को माखन, मिश्री और पंजीरी अत्यंत प्रिय है। प्रतिदिन या जन्माष्टमी पर इसका भोग लगाएँ।
दूसरा — हरे कृष्ण महामंत्र — 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥' — इसे जपने से कृष्ण शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह कलिसंतरणोपनिषद् का सर्वोच्च मंत्र है।
तीसरा — गीता का नित्य पाठ — भगवान कृष्ण ने गीता कही है, इसलिए गीता का पाठ उनके प्रति सबसे गहरा आदर है। एक अध्याय या केवल पाँच श्लोक भी नित्य पढ़ें।
चौथा — वृंदावन भाव — कृष्ण को मित्र, पुत्र, या प्रिय मानकर उनसे बात करें — यह सखा-भाव वैष्णव दर्शन की सर्वोच्च भक्ति है।
पाँचवाँ — तुलसी और पीतांबर — भगवान कृष्ण को तुलसी-माला और पीले वस्त्र अत्यंत प्रिय हैं। मूर्ति पर पीतांबर पहनाएँ और तुलसीमाला से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जपें।





