विस्तृत उत्तर
विष्णु जी के कई महाशक्तिशाली मंत्र शास्त्रों में वर्णित हैं:
मूल मंत्र (सबसे सरल) — 'ॐ नमो नारायणाय' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' — यह बारह अक्षरों का द्वादशाक्षरी मंत्र है जिसे उठते-बैठते, चलते-फिरते कहीं भी जपा जा सकता है। यह सबसे सुलभ और सर्वसिद्ध मंत्र है।
विष्णु स्तुति मंत्र — 'शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥' — यह विष्णु जी के स्वरूप का वर्णन करने वाला श्लोक है और ध्यान-पूजन में बोला जाता है।
विष्णु गायत्री — 'ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्॥' — यह विष्णु जी का गायत्री मंत्र है। इसके नियमित जप से समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है।
विशेष संकट मंत्र — 'कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत: क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥' — किसी आकस्मिक संकट में यह मंत्र 108 बार जपें।
कौन सा कब — नित्य जप के लिए 'ॐ नमो नारायणाय'। ध्यान-पूजन में विष्णु स्तुति। विशेष साधना में विष्णु गायत्री।





