विस्तृत उत्तर
साष्टांग नमस्कार और पंचांग नमस्कार में मुख्य अंतर अंगों की संख्या और उन्हें किस प्रकार उपयोग किया जाता है, उसमें है। शास्त्रों में इनका स्पष्ट वर्गीकरण है:
साष्टांग नमस्कार (अष्टांग दंडवत प्रणाम) — इसमें शरीर के आठ (अष्ट) अंग भूमि को स्पर्श करते हैं। ये हैं: दोनों पाँव, दोनों घुटने, छाती (वक्षस्थल), ठोड़ी (ठुड्डी), और दोनों हथेलियाँ। इसमें व्यक्ति पेट के बल लेट जाता है। शास्त्र में इसका श्लोक है — 'उरसा शिरसा दृष्ट्या मनसा वचसा तथा। पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यां प्रणामोऽष्टाङ्ग उच्यते॥' — इसमें वक्षस्थल, मस्तक, दृष्टि, मन, वचन, पैर, हाथ और घुटने — आठों का भूमि से स्पर्श होता है। यह पुरुषों के लिए सर्वोत्तम प्रणाम है।
पंचांग नमस्कार — इसमें पाँच अंग भूमि या मंदिर की सीढ़ी को स्पर्श करते हैं। ये हैं: दोनों हाथ, दोनों घुटने और मस्तक। इसमें पूर्णतः लेटना नहीं होता। यह स्त्रियों के लिए शास्त्र-विहित प्रणाम है।
अंतर सारांश — साष्टांग में व्यक्ति पेट के बल जमीन पर पूरी तरह लेटता है जबकि पंचांग में घुटने टेककर सिर झुकाया जाता है। धर्मसिंधु ग्रंथ में स्त्रियों के लिए साष्टांग प्रणाम निषिद्ध बताया गया है। षोडशोपचार पूजा में साष्टांग दंडवत प्रणाम सोलहवाँ और अंतिम उपचार है।





