"हरिमर्कटमर्कटायनमः" (पराशर संहिता)
स्रोत एवं साधना: इस द्वादशाक्षर मंत्र का वर्णन पराशर संहिता में मिलता है, जो इसे प्राचीनता और प्रामाणिकता प्रदान करता है। साधना के लिए भगवान राम, हनुमान और शिव का चित्र सामने रखकर, 40 दिन की दीक्षा लेकर प्रतिदिन 108 बार जप करने का विधान है।
लाभ: यह मंत्र किसी भी प्रकार की मनोकामना पूर्ति में सहायक माना गया है।
अंतर्दृष्टि: "हरि मर्कट" का प्रयोग इस मंत्र को विशिष्टता प्रदान करता है। यद्यपि यह भी द्वादशाक्षर है, इसका स्वरूप "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्" से भिन्न है, जो हनुमान मंत्रों की विविधता को दर्शाता है।
