हनुमान सर्वग्रहान् निवारण मंत्र (ग्रह बाधा एवं दुष्ट बुद्धि निवारण हेतु)
मंत्र: “ॐ नमो हनुमते सर्वग्रहान् भूत भविष्यत्−वर्तमानान् दूरस्थ समीपस्यान् छिंधि छिंधि भिंधि भिंधि सर्वकाल दुष्ट बुद्धानुच्चाट्योच्चाट्य परबलान् क्षोभय क्षोभय मम सर्वकार्याणि साधय साधय।ॐ नमो हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् । देहि ॐ शिव सिद्धि ॐ। ह्रां ॐ हरीं ॐ हरूं ॐ हरः स्वाहा।”
देवता: हनुमान।
स्रोत: इस मंत्र का विशिष्ट पौराणिक स्रोत उल्लेखित नहीं है, परन्तु यह हनुमान जी की शाबर एवं तांत्रिक उपासना पद्धतियों का अंग प्रतीत होता है।
प्रयोजन: सभी प्रकार की ग्रह बाधाओं का निवारण, भूत, भविष्य एवं वर्तमान के संकटों से रक्षा, दुष्ट बुद्धि एवं नकारात्मक विचारों का उच्चाटन, शत्रु पक्ष के बल का क्षोभन, तथा सर्व कार्यों में सिद्धि प्राप्त करना।
विधि: इस मंत्र की साधना के लिए हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी का पंचोपचार पूजन करें। शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। हनुमान जी को पुष्पमाला अर्पित करें तथा गूगल की धूप दें। प्रसाद के रूप में भीगे हुए चने और गुड़ का भोग लगाएं। इसके पश्चात् उपरोक्त मंत्र का प्रतिदिन एक या अधिक माला (रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से) ग्यारह दिनों तक जप करें। एक लाख जप से यह मंत्र सिद्ध होता है। ग्यारहवें दिन पाठ के समापन पर दशांश हवन करें, तथा ब्राह्मणों या योग्य याचकों को धन-धान्य का दान करें। अंत में श्री राम का नाम स्मरण करें ।
महत्व: हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड जैसे पाठ हनुमान जी की उपासना में सर्वविदित हैं। तथापि, यह 'सर्वग्रहान् निवारण मंत्र' एक विशिष्ट, विस्तृत और बीज मंत्रों से युक्त है, जो विशेष रूप से ज्योतिषीय ग्रह बाधाओं और गूढ़ नकारात्मक प्रभावों के शमन के लिए है। इसकी तांत्रिक प्रकृति और जटिलता इसे सामान्य साधकों के मध्य अल्पज्ञात बनाती है।






