विस्तृत उत्तर
गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इसे विनायक चतुर्थी भी कहते हैं। यह भगवान गणेश के प्राकट्य उत्सव का दिन है और देश भर में, विशेषकर महाराष्ट्र में, इसे अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है।
व्रत और पूजा की विधि:
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ कर चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
भगवान गणेश की मिट्टी या धातु की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करें।
गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं और स्वच्छ वस्त्र पहनाएं।
चंदन, सिंदूर, हल्दी, रोली लगाएं।
गणेश जी की प्रिय सामग्री अर्पित करें — दूर्वा घास, लाल पुष्प और माला, मोदक और लड्डू।
धूप, दीप जलाएं और 'ॐ गं गणपते नमः' मंत्र का जाप करें।
गणेश जी को नारियल और दक्षिणा अर्पित करें।
गणेश चतुर्थी की कथा सुनें या पढ़ें।
आरती करें — 'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा'।
व्रत के दिन फलाहार रखें — अन्न ग्रहण न करें।
संध्याकाल में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। इस तिथि पर चंद्रमा का दर्शन निषिद्ध माना गया है — पुराणों के अनुसार इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठे कलंक का भय रहता है।
दस दिन (अनंत चतुर्दशी तक) या एक, तीन, पाँच दिन पूजा करके विधिपूर्वक गणेश विसर्जन करें।
