विस्तृत उत्तर
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है — यह गणेश जी का जन्मोत्सव है और सर्वाधिक महत्वपूर्ण गणेश पर्व है।
तिथि: भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी (अगस्त-सितंबर)
अवधि: 1 दिन से 11 दिन (सर्वाधिक 'गणेश उत्सव' 10 दिन)
प्राण प्रतिष्ठा (मूर्ति स्थापना)
- 1मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा लाएं — पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी की मूर्ति श्रेष्ठ
- 2प्रतिमा को शुद्ध स्थान पर स्थापित करें
- 3पंडित जी से प्राण प्रतिष्ठा कराएं
प्राण प्रतिष्ठा मंत्र
> ॐ आं ह्रीं क्रों यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं — अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठंतु।
> अस्यै प्राणाः क्षरंतु च। अस्यै देवत्वम् अर्चायां यौ
> प्रतिष्ठापयामि।
दैनिक पूजा (10 दिनों तक)
प्रातःकाल पूजा
- 1स्नान और स्वच्छ वस्त्र
- 2गणेश जी को स्नान (जल या पंचामृत)
- 3वस्त्र और जनेऊ अर्पण
- 4सिंदूर और पीत चंदन
- 521 दूर्वा अर्पण — यह सबसे महत्वपूर्ण है
- 6लाल पुष्प — 21
- 721 मोदक का भोग
- 8धूप-दीप
- 9गणपति अथर्वशीर्ष पाठ — 1 या 3 बार
- 10'ॐ गं गणपतये नमः' — 108 बार
- 11गणेश आरती
- 1221 मोदक में से 5 प्रसाद में देवी को, 5 देवताओं को — शेष भक्तों को
चंद्रमा दर्शन निषेध
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखना वर्जित है — मिथ्या कलंक लगने की शास्त्रीय कथा है। यदि अनजाने में देख लें तो स्यमंतक मणि की कथा सुनें।
गणेश उत्सव के दिन
- ▸पहला दिन: प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना
- ▸2-9 दिन: नित्य पूजन, भजन, कीर्तन
- ▸10वाँ दिन (अनंत चतुर्दशी): विसर्जन
विसर्जन विधि
- 1अंतिम बार पूर्ण पूजन करें
- 2'गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या' — जयघोष
- 3मूर्ति को नदी/तालाब में विसर्जित करें
- 4विसर्जन मंत्र: 'यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय माम्।'
- 5विसर्जन के बाद घर में स्वच्छता
घर पर सरल विधि
यदि 10 दिन संभव न हो तो 1.5 दिन (डेढ़ दिवसीय) या 3 दिन का उत्सव करें।





