विस्तृत उत्तर
महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। शिव पुराण के अनुसार इस रात शिव का तांडव नृत्य होता है और शिव-पार्वती विवाह का भी यह पर्व है।
चतुर्प्रहर पूजन (रात्रि के 4 पहर में 4 बार पूजा)
प्रथम प्रहर (रात्रि 6-9 बजे)
- ▸जलाभिषेक करें — 'ईशान' नाम से
- ▸'ॐ नमः शिवाय' जप
द्वितीय प्रहर (रात्रि 9-12 बजे)
- ▸दूध से अभिषेक — 'अघोर' नाम से
- ▸बेलपत्र अर्पण
तृतीय प्रहर (रात्रि 12-3 बजे)
- ▸दही से अभिषेक — 'वामदेव' नाम से
- ▸धतूरा, भांग अर्पण
चतुर्थ प्रहर (रात्रि 3-6 बजे)
- ▸घी से अभिषेक — 'सद्योजात' नाम से
- ▸रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप
प्रातःकाल
- ▸व्रत का पारण करें
- ▸ब्राह्मण भोज और दान
व्रत नियम
- ▸पूरे दिन-रात निर्जला या फलाहार व्रत
- ▸जागरण — पूरी रात जागकर शिव भजन
- ▸अगले दिन प्रातः स्नान के बाद पारण
विशेष पूजा सामग्री
- ▸बेलपत्र (त्रिपत्र — त्रिदेव, त्रिकाल का प्रतीक)
- ▸धतूरा (शिव का प्रिय)
- ▸भांग (शिव को अत्यंत प्रिय)
- ▸आक के फूल, नीले कमल
- ▸पंचामृत
महत्व: शिव पुराण कहता है — 'महाशिवरात्रौ यो भक्त्या पूजयेच्छिवमव्ययम्।' इस दिन की गई पूजा 1000 वर्षों की साधना के समान फलदायी है।





