विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय और वास्तु दोनों दृष्टिकोण से मूर्ति को फोटो फ्रेम से अधिक शुभ माना जाता है, हालाँकि दोनों की पूजा मान्य है।
मूर्ति के लाभ
- 1त्रिआयामी स्वरूप — मूर्ति में देवता का पूर्ण स्वरूप होता है, जो भक्त के ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाता है।
- 2अभिषेक योग्य — मूर्ति पर जल, दूध, चंदन आदि से अभिषेक किया जा सकता है, जो फोटो पर संभव नहीं।
- 3प्राण प्रतिष्ठा — मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है जो ऊर्जा का स्तर बढ़ाती है।
- 4षोडशोपचार पूजन — मूर्ति पर सभी 16 उपचारों से पूजा संभव है।
फोटो फ्रेम के बारे में
- ▸यदि मूर्ति रखने की जगह न हो तो फोटो रखना भी शुभ है।
- ▸फोटो का फ्रेम और कांच सदैव साबुत (टूटा न हो) होना चाहिए।
- ▸फोटो स्पष्ट, सौम्य और प्रसन्न मुद्रा वाली हो।
मूर्ति के नियम
- ▸मूर्ति सौम्य और प्रसन्नमुखी हो, क्रोधित या युद्ध मुद्रा वाली न हो।
- ▸मूर्ति खंडित (टूटी) न हो।
- ▸आकार 2-9 इंच तक शुभ है।
- ▸मूर्ति की नियमित पूजा अनिवार्य है — केवल रखकर छोड़ देना उचित नहीं।
व्यावहारिक सुझाव: दोनों रखे जा सकते हैं, लेकिन जिन देवताओं की नियमित पूजा करते हैं उनकी मूर्ति रखें, अन्य देवताओं की फोटो रख सकते हैं।





