विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र दोनों में घर के पूजा घर में मूर्ति के आकार/ऊँचाई पर स्पष्ट नियम बताए गए हैं।
मूर्ति की ऊँचाई/आकार
- 1न्यूनतम: 2 इंच (लगभग 1 अंगुल) — इससे छोटी मूर्ति घर के मंदिर के लिए उपयुक्त नहीं।
- 2अधिकतम: 9 इंच (लगभग 12 अंगुल) — इससे बड़ी मूर्ति घर के लिए अशुभ मानी जाती है।
- 3आदर्श: 3-6 इंच — छोटे-मध्यम घरों और फ्लैट के लिए सर्वोत्तम।
शिवलिंग का विशेष नियम
- ▸शिवलिंग का आकार अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए। शिवलिंग अत्यंत संवेदनशील और शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है, बड़ा शिवलिंग घर के लिए उपयुक्त नहीं।
मूर्ति स्थापना की ऊँचाई (ज़मीन से)
- ▸वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर इतनी ऊँचाई पर हो कि भगवान के चरण पूजा करने वाले व्यक्ति की छाती (हृदय) के स्तर पर हों।
- ▸मूर्ति कभी ज़मीन पर नहीं रखनी चाहिए — ईश्वर का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है।
- ▸बैठकर पूजा करने पर मूर्ति आँखों के स्तर से थोड़ी ऊपर होनी चाहिए।
बड़ी मूर्ति क्यों वर्जित
- ▸ज्योतिष के अनुसार बड़ी मूर्ति में अधिक ऊर्जा होती है जो घर के सीमित स्थान के लिए उपयुक्त नहीं।
- ▸बड़ी मूर्तियों का स्थान मंदिर (गर्भगृह) है, घर नहीं।
- ▸बड़ी मूर्ति की नियमित सेवा और पूजा करना कठिन हो जाता है।
सारांश: घर के मंदिर के लिए 3 से 6 इंच की सौम्य, प्रसन्नमुखी मूर्ति रखें। शिवलिंग अंगूठे के आकार तक। मंदिर की ऊँचाई ऐसी हो कि भगवान के चरण हृदय स्तर पर हों।





