विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और पूजा परंपराओं के अनुसार पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व दिशा की ओर होना सर्वोत्तम माना जाता है।
प्राथमिकता क्रम
- 1पूर्व दिशा — सर्वश्रेष्ठ। सूर्योदय की दिशा होने के कारण यह ऊर्जा, ज्ञान और प्रकाश की दिशा मानी जाती है।
- 2उत्तर दिशा — दूसरा सर्वोत्तम विकल्प। उत्तर को कुबेर की दिशा माना जाता है, यह धन और समृद्धि से जुड़ी है।
- 3पश्चिम दिशा — यदि पूर्व या उत्तर संभव न हो तो पश्चिम दिशा में मुख करके भी पूजा की जा सकती है।
निषेध
- ▸दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा नहीं करनी चाहिए। दक्षिण को यमराज की दिशा माना जाता है और इसे पूजा के लिए अशुभ माना जाता है।
व्यावहारिक सुझाव
- ▸मूर्ति की स्थापना ऐसे करें कि भक्त स्वाभाविक रूप से पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठे।
- ▸बैठकर पूजा करना उचित है, खड़े होकर पूजा करना (विशेषतः शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय) वर्जित माना जाता है।





