विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और धर्मशास्त्र दोनों के अनुसार पूजा घर में भगवान की मूर्ति का मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए, ताकि पूजा करने वाला व्यक्ति पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठे।
सामान्य नियम
- ▸मूर्ति का मुख पश्चिम की ओर हो — भक्त का मुख पूर्व की ओर (सर्वोत्तम)।
- ▸मूर्ति का मुख दक्षिण की ओर हो — भक्त का मुख उत्तर की ओर।
- ▸मूर्ति को दीवार से थोड़ी दूरी पर रखें, दीवार से सटाकर नहीं।
विशेष देवता-अनुसार दिशा (परंपरागत मान्यता)
- ▸सूर्य, ब्रह्मा, विष्णु, महेश — पूर्व में स्थापित करें, मुख पश्चिम की ओर।
- ▸हनुमान जी — दक्षिण दिशा की ओर मुख।
- ▸गणेश, दुर्गा — उत्तर में रखें, मुख दक्षिण की ओर।
- ▸राम दरबार — पूर्व दिशा की ओर रखें।
निषेध
- ▸मूर्ति का मुख सीधे मुख्य दरवाज़े की ओर नहीं होना चाहिए।
- ▸मूर्तियाँ आमने-सामने नहीं रखनी चाहिए।
ध्यान दें: देवता-विशेष दिशाओं में स्थानीय परंपराओं और पारिवारिक रिवाजों में भिन्नता हो सकती है।





