ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
पूजा घर वास्तु📜 वास्तु शास्त्र, धर्मशास्त्र परंपरा2 मिनट पठन

पूजा घर में भगवान की मूर्ति का मुख किस दिशा में हो?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा घर में भगवान की मूर्ति का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर होना चाहिए ताकि भक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पूजा करे। विशेष देवताओं के लिए दिशा-विशेष नियम भी हैं।

📖

विस्तृत उत्तर

वास्तु शास्त्र और धर्मशास्त्र दोनों के अनुसार पूजा घर में भगवान की मूर्ति का मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए, ताकि पूजा करने वाला व्यक्ति पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठे।

सामान्य नियम

  • मूर्ति का मुख पश्चिम की ओर हो — भक्त का मुख पूर्व की ओर (सर्वोत्तम)।
  • मूर्ति का मुख दक्षिण की ओर हो — भक्त का मुख उत्तर की ओर।
  • मूर्ति को दीवार से थोड़ी दूरी पर रखें, दीवार से सटाकर नहीं।

विशेष देवता-अनुसार दिशा (परंपरागत मान्यता)

  • सूर्य, ब्रह्मा, विष्णु, महेश — पूर्व में स्थापित करें, मुख पश्चिम की ओर।
  • हनुमान जी — दक्षिण दिशा की ओर मुख।
  • गणेश, दुर्गा — उत्तर में रखें, मुख दक्षिण की ओर।
  • राम दरबार — पूर्व दिशा की ओर रखें।

निषेध

  • मूर्ति का मुख सीधे मुख्य दरवाज़े की ओर नहीं होना चाहिए।
  • मूर्तियाँ आमने-सामने नहीं रखनी चाहिए।

ध्यान दें: देवता-विशेष दिशाओं में स्थानीय परंपराओं और पारिवारिक रिवाजों में भिन्नता हो सकती है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र, धर्मशास्त्र परंपरा
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

मूर्ति दिशावास्तु शास्त्रपूजा घर

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

पूजा घर में भगवान की मूर्ति का मुख किस दिशा में हो — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको पूजा घर वास्तु से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर वास्तु शास्त्र, धर्मशास्त्र परंपरा पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।