विस्तृत उत्तर
महाशिवरात्रि पूजा की विधि शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में विस्तार से वर्णित है:
महाशिवरात्रि कब
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी। शिव पुराण के अनुसार इस रात शिव और शक्ति का विवाह हुआ था — यही कारण इसे 'महाशिवरात्रि' कहा जाता है।
व्रत की विधि
एक दिन पूर्व (त्रयोदशी)
- ▸एकभोजन — सात्विक भोजन
- ▸मन को तैयार करें — संयम, मौन
महाशिवरात्रि के दिन
- 1ब्रह्ममुहूर्त में स्नान
- 2व्रत संकल्प लें
- 3प्रातः शिव पूजन
चतुर्प्रहर पूजा — रात की चार पूजाएं
शिव पुराण में महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों में पूजा का विशेष विधान है:
| प्रहर | समय | अभिषेक | मंत्र |
|-------|------|---------|-------|
| प्रथम प्रहर | रात 6-9 बजे | दूध | 'ॐ नमः शिवाय' |
| द्वितीय प्रहर | रात 9-12 बजे | दही | 'ॐ नमो भगवते रुद्राय' |
| तृतीय प्रहर | रात 12-3 बजे | घी | 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' |
| चतुर्थ प्रहर | रात 3-6 बजे | शहद | 'ॐ नमः शिवाय' |
प्रत्येक प्रहर की विधि
- 1शिवलिंग का पंचामृत और जल से अभिषेक
- 2बेलपत्र, पुष्प अर्पण
- 3धूप-दीप
- 4'ॐ नमः शिवाय' का जप
- 5शिव आरती
जागरण
पूरी रात जागरण करें — भजन, कीर्तन, शिव स्तोत्र पाठ।
पारण
अगले दिन (चतुर्दशी समाप्ति पर) — प्रातः पूजा के बाद पारण।
शिव पुराण का वचन
शिव पुराण में कहा गया है — महाशिवरात्रि की एक रात का जागरण और पूजन वर्षभर के तप के बराबर फल देता है।





