ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
काली आरती: 'मंगल की सेवा', मूल पाठ, अर्थ और मनोकामना !
काली

काली आरती: 'मंगल की सेवा', मूल पाठ, अर्थ और मनोकामना !

📿 पौराणिक•3 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 8 जनवरी 2026
तुरंत उत्तर

माँ काली की आरती “मंगल की सेवा सुन मेरी देवा”: संपूर्ण मूल पाठ | अर्थ, महिमा एवं ऐतिहासिक संदर्भ !

ज्ञान-सार

अगर पूरा पोस्ट नहीं पढ़ना चाहते, तो यह सारांश पढ़ें — इससे आपको सटीक जानकारी मिलेगी।

क्लिक करते ही लेख के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु एक साफ, छोटे और भरोसेमंद सार में दिखेंगे।

WhatsApp
माँ काली की आरती "मंगल की सेवा सुन मेरी देवा": संपूर्ण पाठ एवं ऐतिहासिक शोध

माँ काली की आरती "मंगल की सेवा सुन मेरी देवा"

1. माँ काली की आरती: मूल पाठ

आरती: मंगल की सेवा सुन मेरी देवा
(ध्रुपद/स्थायी) मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥ ले ज्वाला तेरी भेंट धरे…
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, संतन के भंडार भरे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥ बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्ध करे। चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े॥ जब जब भीड़ पड़ी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
गुरु के वार सकल जग मोह्यो, तरुणी रूप अनूप धरे। माता होकर पुत्र खिलावे, कहीं भार्या भोग करे॥ शुक्र सुखदाई सदा सहाई, संत खड़े जयकार करे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिए, भेंट देने तेरे द्वार खड़े। अटल सिंहासन बैठी माता, सिर सोने का छत्र फिरे॥ वार शनिचर कुमकुम बरनी, जब लुंकड़ पर हुकुम करे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
खड्ग खप्पर त्रिशूल हाथ लिए, रक्तबीज को भस्म करे। शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे, महिषासुर को पकड़ दले॥ आदित वार आदि भवानी, जन अपने का कष्ट हरे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
कुपित होकर दानव मारे, चण्ड मुण्ड सब चूर करे। जब तुम देखो दया रूप हो, पल में संकट दूर करे॥ सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता, जन की अर्ज कबूल करे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
सात बार की महिमा बरनी, सब गुण कौन बखान करे। सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी, अटल भवन में राज करे॥ दर्शन पावे मंगल गावे, सिद्ध साधक तेरी भेंट धरे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शिव शंकर हरि ध्यान धरे। इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चंवर कुबेर डुलाय रहे॥ जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज करे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे॥ (जयकारा: बोल सांचे दरबार की जय!)

2. आरती का उद्गम और ऐतिहासिक संदर्भ

2.1 रचनाकार का विवाद: लोकगीत बनाम आधुनिक कृति

विद्वानों और संगीत इतिहासकारों के बीच इस आरती के रचयिता को लेकर एक रोचक द्वंद्व है, जो यह दर्शाता है कि कैसे लोक साहित्य समय के साथ व्यक्तिगत रचना का रूप ले लेता है।

कवि प्रदीप और सी. अर्जुन का दावा: एक प्रमुख मत यह है कि इस आरती को प्रसिद्ध राष्ट्रवादी और भक्ति गीतकार कवि प्रदीप ने लिखा था और इसका संगीत सी. अर्जुन ने तैयार किया था। 1970-80 के दशक में उषा मंगेशकर द्वारा गाया गया संस्करण इस दावे को बल देता है। कवि प्रदीप की लेखन शैली, जो सरल हिंदी और तत्सम शब्दावली का मिश्रण थी (जैसे "तरुणी रूप अनूप धरे"), इस आरती की भाषा-शैली से मेल खाती है।

बलबीर निर्दोष और सुरिंदर कोहली का संस्करण: दूसरी ओर, उत्तर भारत में जागरण सम्राट के रूप में प्रतिष्ठित नरेंद्र चंचल द्वारा गाए गए संस्करण का श्रेय गीतकार बलबीर निर्दोष और संगीतकार सुरिंदर कोहली को दिया जाता है । नरेंद्र चंचल की गायकी ने इसे शास्त्रीयता के दायरे से निकालकर जन-जन का गीत बना दिया।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

देवी ज्ञान

दुर्गा जी का वाहन क्या है?

दुर्गा जी का मुख्य वाहन सिंह (शेर) है — यह शक्ति, साहस और पशु वृत्तियों पर नियंत्रण का प्रतीक है। कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) और शैलपुत्री-महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है।

देवी ज्ञान

काली के 108 नाम क्या हैं?

काली माँ के 108 नाम कालिकाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् में हैं। प्रमुख नाम हैं — काली, महाकाली, भद्रकाली, कालरात्रि, चामुंडा, भैरवी, श्मशानवासिनी, दुर्गा, नित्या, अंबिका, महामाया, आद्या, जगन्माता और मोक्षदायिनी।

देवी ज्ञान

नवदुर्गा के नाम क्या हैं?

नवदुर्गा के नाम (देवी कवच): 1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघंटा 4. कूष्मांडा 5. स्कंदमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री। नवरात्रि के नौ दिन क्रमशः इन नौ देवियों की पूजा होती है।

देवी ज्ञान

दुर्गा जी का वाहन क्या है?

दुर्गा का वाहन सिंह है। सप्तशती में हिमालय ने देवी को सिंह दिया। सिंह शक्ति, पराक्रम और धर्म की विजय का प्रतीक है। नवदुर्गा में कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) और शैलपुत्री-महागौरी का वृषभ (नंदी) है।

देवी नाम

काली के 108 नाम क्या हैं?

काली के 108 नाम प्रमुख: काली, महाकाली, कपालिनी, कालरात्रि, चामुंडा, चंडिका, भद्रकाली, भैरवी, महामाया, श्यामा, दिगंबरा, श्मशानवासिनी, दक्षिणकालिका, आद्याशक्ति, जगदंबा। प्रत्येक नाम 'ॐ [नाम] नमः' से जपें।

📚 इसे भी पढ़ें

श्री काली चालीसा: शत्रु नाश, तंत्र बाधा मुक्ति और असीम शक्ति !
काली

श्री काली चालीसा: शत्रु नाश, तंत्र बाधा मुक्ति और असीम शक्ति !

श्मशान काली शाबर मंत्र: शत्रु-प्रेत नाशक, सिद्ध ताली साधना !
काली

श्मशान काली शाबर मंत्र: शत्रु-प्रेत नाशक, सिद्ध ताली साधना !

महाकाली साधना: 21 दिन में शत्रु-नाश और काल-भय से मुक्ति!
काली

महाकाली साधना: 21 दिन में शत्रु-नाश और काल-भय से मुक्ति!

गुह्य काली रहस्य: स्वरूप, बीज मंत्र और तांत्रिक साधना (विधि)!
काली

गुह्य काली रहस्य: स्वरूप, बीज मंत्र और तांत्रिक साधना (विधि)!

धनदा काली कौन हैं? स्वरूप, मंत्र और 'धन-प्राप्ति' साधना !
काली

धनदा काली कौन हैं? स्वरूप, मंत्र और 'धन-प्राप्ति' साधना !

श्मशान काली कौन हैं? स्वरूप, मंत्र और तांत्रिक उपासना (विधि)!
काली

श्मशान काली कौन हैं? स्वरूप, मंत्र और तांत्रिक उपासना (विधि)!

माँ चंड काली कौन हैं? देवीमाहात्म्यम् कथा, रहस्य और मंत्र !
काली

माँ चंड काली कौन हैं? देवीमाहात्म्यम् कथा, रहस्य और मंत्र !

महाकाल की शक्ति 'दक्षिणा काली': स्वरूप, मंत्र और उपासना (विधि)!
काली

महाकाल की शक्ति 'दक्षिणा काली': स्वरूप, मंत्र और उपासना (विधि)!

काली तंत्र रहस्य: षोडशी विद्या और नवरूप साधना (सरल हिंदी)!
काली

काली तंत्र रहस्य: षोडशी विद्या और नवरूप साधना (सरल हिंदी)!

दक्षिण काली कवच: रुद्रयामल तंत्र, अकाल मृत्यु और शत्रु नाश !
काली

दक्षिण काली कवच: रुद्रयामल तंत्र, अकाल मृत्यु और शत्रु नाश !

काली

काली मंत्र: रुद्रयामल तंत्र का 'मूल पाठ' !

काली

श्मशान काली मंत्र: रुद्रयामल तंत्र का 'मूल पाठ' !