विस्तृत उत्तर
दुर्गा के वाहन का वर्णन दुर्गा सप्तशती के द्वितीय चरित्र और देवी भागवत में मिलता है:
दुर्गा का वाहन — सिंह (शेर)
दुर्गा का मुख्य वाहन सिंह है। सप्तशती के द्वितीय अध्याय में महिषासुर मर्दनी का वर्णन है जहाँ देवी सिंह पर सवार होकर महिषासुर से युद्ध करती हैं।
सिंह कहाँ से आया
दुर्गा सप्तशती में वर्णित है — जब सभी देवताओं की शक्ति एकत्र होकर दुर्गा का रूप बनी, तब हिमालय ने वाहन के रूप में सिंह प्रदान किया।
सिंह का प्रतीकात्मक अर्थ
- 1शक्ति और पराक्रम: सिंह वन का राजा — देवी की अपराजेय शक्ति का प्रतीक
- 2धर्म की विजय: सिंह पर सवार देवी — धर्म अधर्म पर सवार है
- 3इच्छाशक्ति: सिंह को वश में करना — देवी की असीम इच्छाशक्ति
- 4रक्षक: सिंह रक्षा करता है — देवी भक्तों की रक्षा करती हैं
नवदुर्गा के वाहन
| देवी | वाहन |
|------|------|
| शैलपुत्री | वृषभ (नंदी) |
| ब्रह्मचारिणी | पदचारी (पैदल) |
| चंद्रघंटा | सिंह |
| कूष्मांडा | सिंह |
| स्कंदमाता | सिंह |
| कात्यायनी | सिंह |
| कालरात्रि | गर्दभ (गधा) |
| महागौरी | वृषभ |
| सिद्धिदात्री | कमल / सिंह |
दुर्गा बनाम काली
काली का वाहन भी सिंह है — किंतु काली को श्मशान भूमि में खड़े या शव पर खड़े दिखाया जाता है।
नवरात्रि में वाहन का महत्व
ज्योतिष परंपरा में नवरात्रि के आगमन के वार के अनुसार देवी के वाहन का फल निर्धारित होता है — यह एक लोकमान्यता है।





