विस्तृत उत्तर
दुर्गा जी के वाहन का विस्तृत वर्णन पुराणों में मिलता है:
मुख्य वाहन: सिंह (शेर)
सिंह का प्रतीकार्थ
- ▸सिंह शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक है
- ▸देवी का सिंह वाहन बताता है कि वे शक्ति के ऊपर सवार हैं — शक्ति को नियंत्रित करने वाली
- ▸सिंह की दहाड़ = देवी का नाद (शब्द शक्ति)
नवदुर्गा के विभिन्न वाहन
- 1शैलपुत्री — वृषभ (बैल)
- 2ब्रह्मचारिणी — पैदल (कोई वाहन नहीं — तपस्विनी)
- 3चंद्रघंटा — सिंह
- 4कूष्मांडा — सिंह
- 5स्कंदमाता — सिंह
- 6कात्यायनी — सिंह
- 7कालरात्रि — गर्दभ (गधा)
- 8महागौरी — वृषभ (बैल)
- 9सिद्धिदात्री — सिंह / कमल
देवी के अन्य रूपों के वाहन
- ▸सरस्वती — हंस
- ▸लक्ष्मी — उलूक (उल्लू) — रात्रि में, और कमल पर खड़ी
- ▸काली — शव (शिव) पर खड़ी
- ▸चामुंडा — प्रेत पर आसीन
वाहन का आध्यात्मिक अर्थ
सिंह पर सवार देवी का अर्थ है — वे अपनी शक्ति (पशु वृत्तियों) को वश में किए हुए हैं। मनुष्य को भी अपनी पशु वृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) को देवी की तरह नियंत्रित करना चाहिए।





