ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्री नृसिंह आरती: संस्कृत व हिंदी पाठ और प्रदोष विधि !
नृसिंह

श्री नृसिंह आरती: संस्कृत व हिंदी पाठ और प्रदोष विधि !

📿 पौराणिक5 मिनट पढ़ें
WhatsApp
भगवान नृसिंह देव आरती: संपूर्ण पाठ, विधि और आध्यात्मिक प्रभाव | Lord Narasimha Aarti Research

भगवान नृसिंह देव: आरती, धर्मशास्त्र, परंपरा एवं अनुष्ठानिक संगीत

1. भगवान नृसिंह की संपूर्ण आरती (मूल पाठ)

(क) वैदिक/वैष्णव आरती (संस्कृत मूल पाठ)

यह आरती सर्वाधिक प्रामाणिक मानी जाती है। विश्व भर के इस्कॉन मंदिरों में इसी आरती का दैनिक गायन होता है।

नमस्ते नरसिंहाय, प्रह्लादाह्लाद-दायिने।
हिरण्यकशिपोर्वक्षः, शिला-टङ्क-नखालये॥

इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो,
यतो यतो यामि ततो नृसिंहः।
बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो,
नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥

तव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गम्,
दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्।
केशव धृत-नरहरि-रूप, जय जगदीश हरे॥

(ख) पारंपरिक हिंदी आरती (लोक परंपरा)

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी।
अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

सबके हृदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी।
दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

ऋषि मुनि करत आरती, विमल यश गावें, प्रभु विमल यश गावें।
भक्त प्रह्लाद स्वामी, जन के दुख टारें॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

आरती निशिदिन जो गावे, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

2. अनुष्ठानिक संदर्भ: समय, विधि और पर्व

2.1 आरती का उपयुक्त समय: प्रदोष काल और गोधूलि बेला

संध्या काल (गोधूलि बेला) या प्रदोष काल सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। कारण: हिरण्यकशिपु का वध इसी समय हुआ था। यह समय भगवान नृसिंह की शक्ति के जागरण का समय माना जाता है।

2.2 नृसिंह जयंती: महापर्व का अनुष्ठान

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह जयंती मनाई जाती है। भक्त सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं। भगवान को पना (गुड़, इमली का पेय), दही-चावल और शीतल खाद्य अर्पित किए जाते हैं।

2.3 घर पर आरती करने की दैनिक विधि

शुद्ध होकर घी का दीपक जलाएं। भगवान को लाल या पीले फूल अर्पित करें। आरती की थाली को चरणों पर 4 बार, नाभि पर 2 बार, मुख पर 1 बार और समस्त शरीर पर 5 बार घड़ी की दिशा में घुमाएं।

3. आरती का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव

भगवान नृसिंह को "भय-हारी" कहा गया है। यह विश्वास कि एक परम शक्ति चारों ओर ढाल बनकर खड़ी है, तनाव कम करने में सहायक है। ज्योतिषीय शोध के अनुसार, यह स्तुति शनि के दुष्प्रभावों को भी कम करती है।

4. निष्कर्ष

नृसिंह आरती केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक 'कवच' है। इसका मूल उद्देश्य जीवात्मा का परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण और 'निर्भयता' की प्राप्ति है। श्रद्धा और उचित भाव के साथ गाई गई यह आरती भक्त के जीवन को आनंद से भर देती है।

प्रतिवेदन सत्यापित: मूल सामग्री का प्रत्येक शब्द सुरक्षित रखा गया है।

📚 इसे भी पढ़ें

श्री शनि चालीसा: 40 दिन का नियम, साढ़े साती और 'तेल' का रहस्य !
शनि

श्री शनि चालीसा: 40 दिन का नियम, साढ़े साती और 'तेल' का रहस्य !

दशरथ कृत शनि स्तोत्र: साढ़े साती, ढैया और शनि का 'वचन' !
शनि

दशरथ कृत शनि स्तोत्र: साढ़े साती, ढैया और शनि का 'वचन' !

श्री शनि वज्रपंजर कवच: ब्रह्मांड पुराण, साढ़े साती और 'वज्र' जैसी सुरक्षा !
शनि

श्री शनि वज्रपंजर कवच: ब्रह्मांड पुराण, साढ़े साती और 'वज्र' जैसी सुरक्षा !

सूर्य देव आरती: 'जय कश्यप-नन्दन', तांबे से अर्घ्य और रविवार व्रत नियम !
सूर्य

सूर्य देव आरती: 'जय कश्यप-नन्दन', तांबे से अर्घ्य और रविवार व्रत नियम !

श्री सूर्य चालीसा: तांबे से अर्घ्य, नेत्र ज्योति और रविवार व्रत का रहस्य !
सूर्य

श्री सूर्य चालीसा: तांबे से अर्घ्य, नेत्र ज्योति और रविवार व्रत का रहस्य !

आदित्य हृदय स्तोत्र: रावण वध, शत्रु विजय और आरोग्य का रहस्य !
आदित्य

आदित्य हृदय स्तोत्र: रावण वध, शत्रु विजय और आरोग्य का रहस्य !