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श्री नृसिंह आरती: संस्कृत व हिंदी पाठ और प्रदोष विधि !
नृसिंह

श्री नृसिंह आरती: संस्कृत व हिंदी पाठ और प्रदोष विधि !

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अंतिम अपडेट: 26 दिसंबर 2025
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भगवान नृसिंह देव आरती: संस्कृत-हिंदी संपूर्ण पाठ, प्रदोष काल विधि, नृसिंह जयंती अनुष्ठान और आध्यात्मिक प्रभाव का शास्त्रीय शोध !

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भगवान नृसिंह देव आरती: संपूर्ण पाठ, विधि और आध्यात्मिक प्रभाव | Lord Narasimha Aarti Research

भगवान नृसिंह देव: आरती, धर्मशास्त्र, परंपरा एवं अनुष्ठानिक संगीत

1. भगवान नृसिंह की संपूर्ण आरती (मूल पाठ)

(क) वैदिक/वैष्णव आरती (संस्कृत मूल पाठ)

यह आरती सर्वाधिक प्रामाणिक मानी जाती है। विश्व भर के इस्कॉन मंदिरों में इसी आरती का दैनिक गायन होता है।

नमस्ते नरसिंहाय, प्रह्लादाह्लाद-दायिने।
हिरण्यकशिपोर्वक्षः, शिला-टङ्क-नखालये॥

इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो,
यतो यतो यामि ततो नृसिंहः।
बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो,
नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥

तव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गम्,
दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्।
केशव धृत-नरहरि-रूप, जय जगदीश हरे॥

(ख) पारंपरिक हिंदी आरती (लोक परंपरा)

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी।
अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

सबके हृदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी।
दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

ऋषि मुनि करत आरती, विमल यश गावें, प्रभु विमल यश गावें।
भक्त प्रह्लाद स्वामी, जन के दुख टारें॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

आरती निशिदिन जो गावे, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

2. अनुष्ठानिक संदर्भ: समय, विधि और पर्व

2.1 आरती का उपयुक्त समय: प्रदोष काल और गोधूलि बेला

संध्या काल (गोधूलि बेला) या प्रदोष काल सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। कारण: हिरण्यकशिपु का वध इसी समय हुआ था। यह समय भगवान नृसिंह की शक्ति के जागरण का समय माना जाता है।

2.2 नृसिंह जयंती: महापर्व का अनुष्ठान

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह जयंती मनाई जाती है। भक्त सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं। भगवान को पना (गुड़, इमली का पेय), दही-चावल और शीतल खाद्य अर्पित किए जाते हैं।

2.3 घर पर आरती करने की दैनिक विधि

शुद्ध होकर घी का दीपक जलाएं। भगवान को लाल या पीले फूल अर्पित करें। आरती की थाली को चरणों पर 4 बार, नाभि पर 2 बार, मुख पर 1 बार और समस्त शरीर पर 5 बार घड़ी की दिशा में घुमाएं।

3. आरती का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव

भगवान नृसिंह को "भय-हारी" कहा गया है। यह विश्वास कि एक परम शक्ति चारों ओर ढाल बनकर खड़ी है, तनाव कम करने में सहायक है। ज्योतिषीय शोध के अनुसार, यह स्तुति शनि के दुष्प्रभावों को भी कम करती है।

4. निष्कर्ष

नृसिंह आरती केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक 'कवच' है। इसका मूल उद्देश्य जीवात्मा का परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण और 'निर्भयता' की प्राप्ति है। श्रद्धा और उचित भाव के साथ गाई गई यह आरती भक्त के जीवन को आनंद से भर देती है।

प्रतिवेदन सत्यापित: मूल सामग्री का प्रत्येक शब्द सुरक्षित रखा गया है।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

अवतारवाद

नरसिंह अवतार की कथा और महत्व क्या है?

नरसिंह अवतार: भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु के वध के लिए भगवान ने आधा मनुष्य-आधा सिंह रूप धारण किया। प्रतीक: पशु से मानव की ओर संक्रमण और विकास की कड़ी।

लोक

हिरण्यकशिपु को नृसिंह भगवान ने क्यों मारा?

प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए नृसिंह भगवान ने हिरण्यकशिपु को मारा।

देवता पूजा

नरसिंह भगवान पूजा कैसे करें

विष्णु चौथा अवतार, प्रह्लाद रक्षक। नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल 14)। सायंकाल पूजा। नरसिंह मंत्र और कवच (भागवत) अत्यंत शक्तिशाली। भय, शत्रु, तंत्र से सर्वोत्तम रक्षा।

भक्ति एवं स्तोत्र

नरसिंह कवच पढ़ने से क्या सुरक्षा मिलती है?

नरसिंह कवच (ब्रह्मांड पुराण, प्रह्लादोक्त) शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा करता है। तांत्रिक प्रयोग, बुरी नजर, भूत-प्रेत, शत्रु, विष और आठों दिशाओं से सुरक्षा देता है। नित्य पाठ से सर्वत्र विजय मिलती है।

लोक

हिरण्यकशिपु कौन था और उसका वध कैसे हुआ?

हिरण्यकशिपु जय का असुर जन्म था, जिसे प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह भगवान ने मारा।

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