ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
नवग्रह आरती: शनि-राहु शांति, समस्त दोष निवारण और भाग्य !
नवग्रह

नवग्रह आरती: शनि-राहु शांति, समस्त दोष निवारण और भाग्य

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 8 जनवरी 2026
तुरंत उत्तर

नवग्रह आरती: संपूर्ण मूल पाठ | 9 ग्रहों के शक्तिशाली बीज मंत्र, जप-विधान और ग्रह-शांति के अचूक नियम

ज्ञान-सार

अगर पूरा पोस्ट नहीं पढ़ना चाहते, तो यह सारांश पढ़ें — इससे आपको सटीक जानकारी मिलेगी।

क्लिक करते ही लेख के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु एक साफ, छोटे और भरोसेमंद सार में दिखेंगे।

WhatsApp
नवग्रह आरती: वैदिक परंपरा, पाठ एवं शक्तिशाली बीज मंत्र | Navgraha Aarti & Beej Mantras

नवग्रह आरती: वैदिक परंपरा, साहित्यिक उद्गम और अनुष्ठानिक पद्धति का विस्तृत शोध प्रतिवेदन

1. नवग्रह आरती का मूल पाठ (संपूर्ण)

आरती श्री नवग्रहों की कीजै आरती श्री नवग्रहों की कीजै । बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै ॥
सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर । जाकी कृपा कबहुत नहिं छीजै ॥ रूप चंद्र शीतलता लायें । शांति स्नेह सरस रस भीजै ॥ (आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
मंगल हरे अमंगल सारा । सौम्य सुधा रस अमृत पीजै ॥ बुध सदा वैभव यश लीये । सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै ॥ (आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो । प्रगति सदा मानव पै रीझे ॥ शुक्र तर्क विज्ञान बढावै । देश धर्म सेवा यश लीजे ॥ (आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
न्यायधीश शनि अति प्यारे । जप तप श्रद्धा शनि को दीजै ॥ राहु मन का भरम हरावे । साथ न कबहु कुकर्म न दीजै ॥ (आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै । पराधीनता मनहित खीजै ॥ जो नवग्रह की आरती गावे । सब सुख भोग परम पद पावे ॥ (आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)

बीज मंत्र एवं जप विधान

ग्रह (Planet) बीज मंत्र (Beej Mantra) जप संख्या (अनुशंसित)
सूर्य ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः 7000 (40 दिन में)
चंद्र ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः 11,000
मंगल ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः 10,000
बुध ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः 9,000
गुरु ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः 11,000
शुक्र ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः 16,000
शनि ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः 23,000
राहु ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः 18,000
केतु ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः 17,000

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

पूजा विधि

नवग्रह शांति पूजा की विधि क्या है?

नवग्रह शांति: मण्डल स्थापना (9 ग्रह अपने अनाज-वस्त्र सहित) → पूजन-मंत्र → नवग्रह स्तोत्र → प्रत्येक ग्रह की विशेष समिधा से हवन → निर्धारित जप संख्या → ग्रहानुसार दान। ज्योतिषीय परामर्श और अनुभवी पुरोहित आवश्यक।

यंत्र

नवग्रह यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

रविवार/गुरुवार, गंगाजल+पंचामृत शुद्धि, पूर्व/उत्तर। नवग्रह स्तोत्र + 9 बीज 108-108। हवन (9 सामग्री)। नित्य: स्तोत्र+दीपक। सर्वग्रह शांति। ज्योतिषी से सही यंत्र चयन।

देवता पूजा

नवग्रह देवताओं पूजा एक साथ कैसे

नौ सुपारी या यंत्र, प्रत्येक ग्रह रंग फूल, 9 बीज मंत्र 11/108 बार। नवग्रह स्तोत्र। सरलतम — महामृत्युंजय या गायत्री सभी ग्रह शांत करता। विशेष — पंडित से नवग्रह हवन।

ज्योतिष

नवग्रह शांति मंत्र का जप एक साथ कैसे करें?

सरलतम: नवग्रह स्तोत्र ('जपाकुसुमसंकाशं...') प्रतिदिन = 5 मिनट = 9 ग्रह शांत। क्रमिक: 9 ग्रह × 108 = 972 जप। एकत्र बीज मंत्र (सभी बीज एक में) 108 बार। शनिवार/रविवार। सूर्योदय।

ज्योतिष उपाय

नवग्रह यंत्र कैसे स्थापित करें?

शुक्ल पक्ष रविवार/नवरात्रि। पूर्व/ईशान दिशा, लाल कपड़ा, पंचामृत+गंगाजल शुद्धि, 'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी...' 108 बार। प्रतिदिन धूप-दीप। 9 ग्रह एक साथ शांत। प्रामाणिक यंत्र+नित्य पूजा अनिवार्य।

📚 इसे भी पढ़ें

दुर्गा शाबर मंत्र: धन, नौकरी व व्यापार सिद्धि (अचूक उपाय) !
दुर्गा

दुर्गा शाबर मंत्र: धन, नौकरी व व्यापार सिद्धि (अचूक उपाय) !

नवग्रह और साक्षी मंत्र: आपके कर्मों का 'हिसाब' कैसे रखा जाता है?
नवग्रह

नवग्रह और साक्षी मंत्र: आपके कर्मों का 'हिसाब' कैसे रखा जाता है?

हनुमान बीज मंत्र: ग्रह दोष और शत्रु नाश का रहस्यमयी उपाय !
हनुमान

हनुमान बीज मंत्र: ग्रह दोष और शत्रु नाश का रहस्यमयी उपाय !

महागणपति बीज मंत्र: विद्या, वशीकरण और संपत्ति का उपाय !
महागणपति

महागणपति बीज मंत्र: विद्या, वशीकरण और संपत्ति का उपाय !

विष्णु चतुर्व्यूह साधना: 7 दिन में रक्षा-सिद्धि, 4 गुप्त महामंत्र !
विष्णु

विष्णु चतुर्व्यूह साधना: 7 दिन में रक्षा-सिद्धि, 4 गुप्त महामंत्र !

श्री महालक्ष्मी कवचम्: ब्रह्मवैवर्त पुराण पाठ और तांत्रिक विधि !
महालक्ष्मी

श्री महालक्ष्मी कवचम्: ब्रह्मवैवर्त पुराण पाठ और तांत्रिक विधि !

नवग्रह चालीसा: शनि-राहु शांत, दुर्भाग्य नाश और राजयोग !
नवग्रह

नवग्रह चालीसा: शनि-राहु शांत, दुर्भाग्य नाश और राजयोग !

श्री काली चालीसा: शत्रु नाश, तंत्र बाधा मुक्ति और असीम शक्ति !
काली

श्री काली चालीसा: शत्रु नाश, तंत्र बाधा मुक्ति और असीम शक्ति !