दुर्गा शाबर मंत्र (धन-धान्य, उन्नति हेतु)
ॐ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंह वाहिनीं
बीस हस्ती भगवती, रत्न मण्डित सोनन
की माल। उत्तर पथ में आन बैठी,
हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि−सिद्धि। धन−धान्य देहि
देहि, कु रू कु रू स्वाहा।
देवता:
दुर्गा (चामुण्डा सिंह वाहिनी)।
स्रोत:
शाबर तंत्र परंपरा।
प्रयोजन:
सभी कार्यों में सिद्धि, लक्ष्मी (धन-धान्य) की प्राप्ति, नौकरी में उन्नति, तथा व्यापार में वृद्धि।
विधि:
इस मंत्र को सवा लाख (1,25,00) बार जप करने से यह सिद्ध होता है। इसके पश्चात् आवश्यकतानुसार श्रद्धापूर्वक एक माला जप करने से कार्य सिद्ध होते हैं 4।
महत्व:
यह देवी दुर्गा का एक व्यापक फलदायक शाबर मंत्र है, जिसमें उनके सिंहवाहिनी चामुण्डा स्वरूप का आवाहन किया गया है। 'बीस हस्ती भगवती' जैसे उल्लेख उनकी अपार शक्ति को दर्शाते हैं।
