विस्तृत उत्तर
धनतेरस पर सोना-चाँदी खरीदने के पीछे पौराणिक, धार्मिक और व्यावहारिक तीनों प्रकार के कारण हैं।
पौराणिक कारण यह है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे सोने या धातु का कलश लेकर प्रकट हुए इसलिए इस दिन धातु लाने की परंपरा बनी। धन्वंतरि को माता लक्ष्मी का भ्राता भी कहा जाता है और उन्हें सोना-चाँदी अत्यंत प्रिय है — इसलिए इस दिन धातु खरीदने से उनकी कृपा मिलती है।
एक और प्रचलित लोककथा है कि एक राजकुमार के बारे में ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि शादी के चौथे दिन उसे साँप डस लेगा। उसकी नवविवाहिता पत्नी ने महल के प्रवेश द्वार पर सोने-चाँदी के गहनों का ढेर लगाकर और अनेक दीप जलाकर यम को अंधा कर दिया, जिससे राजकुमार की जान बच गई। तभी से इस दिन सोना खरीदने और यम देव के नाम पर दीप जलाने की परंपरा चली।
धार्मिक दृष्टिकोण से, सोने को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। सोना घर में लाना माता लक्ष्मी को आमंत्रित करने के समान है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर जो धातु खरीदी जाए, वह 13 गुना अधिक फल देती है — इसीलिए यह दिन 'धन-त्रयोदशी' भी कहलाता है। आयुर्वेद के अनुसार सोने-चाँदी के बर्तनों में भोजन करने से स्वास्थ्य लाभ होता है — और धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता हैं, इसलिए इस दिन उन्हें स्मरण करते हुए धातु खरीदना एक सात्विक परंपरा है।





