विस्तृत उत्तर
विश्वकर्मा पूजा प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को मनाई जाती है। इस दिन कन्या संक्रांति होती है — सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, इसीलिए यह तिथि विश्वकर्मा जयंती के रूप में स्थिर है। यह पर्व मुख्यतः उत्तर और पूर्वी भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन कारखानों, उद्योगों, कार्यस्थलों और कारीगरों के घरों में मशीनों, औजारों, वाहनों और कंप्यूटर आदि की सफाई करके उन्हें तिलक लगाया जाता है और पूजा की जाती है। शास्त्रोक्त विधि में प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ स्थान पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। पुष्प, रोली, चंदन, धूप और दीप से पूजन होता है। विश्वकर्मा जी की आरती और कथा का श्रवण किया जाता है। प्रसाद बाँटा जाता है। कई स्थानों पर अगले दिन नदी या जलाशय में प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाता है। यह पर्व इंजीनियरों, कारीगरों, शिल्पियों और श्रमिकों का विशेष पर्व माना जाता है — इस दिन उपकरणों की पूजा करके भगवान विश्वकर्मा से कुशलता और समृद्धि की कामना की जाती है।





