विस्तृत उत्तर
अमरावती का निर्माण ब्रह्मांड के सर्वोच्च वास्तुकार 'विश्वकर्मा' द्वारा किया गया है। विश्वकर्मा ब्रह्मा जी या कश्यप के पुत्र माने जाते हैं और वे देवताओं के महान शिल्पकार हैं जिन्होंने देवताओं के विमान, अस्त्र और नगरियों का निर्माण किया। विश्वकर्मा का उल्लेख देवराज इन्द्र की राजसभा सुधर्मा के सदस्यों में भी महाभारत के सभा पर्व में किया गया है। महाभारत में विश्वकर्मा को त्वष्टा के नाम से भी जाना जाता है। अमरावती के निर्माण में विश्वकर्मा ने जो तकनीक और सामग्री उपयोग की वह पृथ्वी की किसी भी निर्माण कला से अतुलनीय है — इसमें विशुद्ध जाम्बूनद स्वर्ण और हीरों का उपयोग किया गया है। यही विश्वकर्मा देवताओं के लिए देव-विमान और इन्द्र का वज्र भी बनाते थे।
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