गणेश पूजागणेश विसर्जन कितने दिन बाद करना चाहिए?1.5 दिन सामान्य, 10 दिन (अनंत चतुर्दशी) सर्वोत्तम। 3/5/7/11/21 भी मान्य। विसर्जन पूर्व पूर्ण पूजा+आरती। नदी/कृत्रिम टैंक। मिट्टी मूर्ति = इको-फ्रेंडली।#विसर्जन#दिन#गणेश चतुर्थी
व्रत एवं त्योहारसंकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में अंतरशुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी में रात्रि को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है, जो इसकी मुख्य विशेषता है। मंगलवार की संकष्टी को अंगारकी कहते हैं।#संकष्टी चतुर्थी#विनायक चतुर्थी#गणेश चतुर्थी
व्रत एवं त्योहारगणेश चतुर्थी व्रत की विधिगणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। मूर्ति स्थापना, पंचामृत स्नान, दूर्वा, मोदक, लाल फूल, धूप-दीप, कथा और आरती मुख्य अंग हैं। इस दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित है।#गणेश चतुर्थी#विनायक चतुर्थी#गणपति पूजा
दैनिक आचारगणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से दोष लगता है क्याहाँ — भागवत पुराण (10.57) आधारित। गणेश ने चंद्र को शाप दिया; कृष्ण को भी स्यमंतक मणि चोरी का कलंक लगा। उपाय: 'सिंहः प्रसेनमवधीत्...' 21-108 बार + स्यमंतक कथा पढ़ें + गणेश पूजन। पौराणिक शास्त्रीय आधार।#गणेश चतुर्थी#चंद्रमा#कलंक
त्योहार पूजागणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखना अशुभ क्यों माना जाता है?चन्द्र अशुभ: चन्द्रमा ने गणेश का उपहास → श्राप: 'देखने वाले पर मिथ्या दोष।' कृष्ण पर भी स्यमंतक आरोप। उपाय: स्यमंतक कथा + 'सिंहः प्रसेनम...' मंत्र + गणेश व्रत।#गणेश चतुर्थी#चंद्रमा#श्राप
त्योहार पूजागणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना कैसे करें?गणपति स्थापना: मिट्टी मूर्ति → चौकी सज्जा → प्राण प्रतिष्ठा (पंचामृत स्नान, 'ॐ गं गणपतये नमः') → षोडशोपचार → गणेश अथर्वशीर्ष → 21 मोदक भोग → आरती → प्रतिदिन पूजा → अनंत चतुर्दशी विसर्जन। दूर्वा 21 गाँठ। चन्द्र दर्शन वर्जित।#गणेश चतुर्थी#गणपति स्थापना#प्राण प्रतिष्ठा
पर्व पूजागणेश चतुर्थी पूजा कैसे करें?भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित करें। 10 दिन प्रतिदिन 21 दूर्वा, 21 मोदक, सिंदूर अर्पण, गणपति अथर्वशीर्ष पाठ और आरती करें। चतुर्थी पर चंद्रमा न देखें। अनंत चतुर्दशी को विसर्जन करें।#गणेश चतुर्थी#विनायक चतुर्थी#पर्व पूजा
गणेश पूजागणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना की विधि क्या है?मिट्टी मूर्ति, लाल कपड़ा/चौकी। प्राण प्रतिष्ठा: 'ॐ गं गणपतये नमः'। षोडशोपचार। मोदक+21 दूर्वा+लाल फूल। अथर्वशीर्ष पाठ। विसर्जन: 1.5-10 दिन। चंद्र दर्शन वर्जित।#गणेश चतुर्थी#स्थापना#विधि