कर्मकांड विधिआचमन का मंत्र क्या है और इसकी विधि क्या है?आचमन के लिए हाथ में जल लेकर तीन बार क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः' और 'ॐ माधवाय नमः' बोलकर जल ग्रहण किया जाता है। अंत में 'ॐ हृषीकेशाय नमः' बोलकर हाथ धो लिए जाते हैं।#आचमन#शुद्धि#नारायण
पूजा घर वास्तुपूजा घर में फोटो फ्रेम रखें या मूर्ति, कौन अधिक शुभ?मूर्ति फोटो फ्रेम से अधिक शुभ मानी जाती है क्योंकि इसमें अभिषेक, प्राण प्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजन संभव है। फोटो भी मान्य है, पर मूर्ति को प्राथमिकता दें। दोनों सौम्य मुद्रा में और अखंडित होनी चाहिए।#फोटो फ्रेम#मूर्ति
विष्णु एवं वैष्णव परंपराविष्णु जी की सुदर्शन चक्र पूजा कैसे करें?सुदर्शन चक्र पूजा में स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें, विष्णु प्रतिमा पर पंचामृत अभिषेक करें, तुलसी दल, कमल व पीले फूल अर्पित करें, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'ॐ क्रीं सुदर्शनाय नमः' मंत्र जपें। गुरुवार को यह पूजा विशेष फलदायी होती है।#सुदर्शन चक्र#विष्णु पूजा#पूजा विधि
पूजा विधि एवं कर्मकांडचंदन तिलक कैसे बनाएं और कैसे लगाएंचंदन की लकड़ी को पत्थर पर जल से घिसकर पेस्ट बनाएँ। अनामिका अंगुली से माथे के आज्ञाचक्र पर लगाएँ। 'ॐ चंदनस्य महत्पुण्यं...' मंत्र के साथ लगाना शुभ माना गया है।#चंदन तिलक#तिलक बनाने की विधि#चंदन
शिवलिंग प्रकारस्फटिक शिवलिंग की पूजा का क्या विशेष विधान बताया गया है?शैव आगम: स्फटिक शिवलिंग सर्वोच्च शुद्ध पदार्थ। तेज ज्योतिर्लिंग समान। 'स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि' (शिव पुराण)। शुभ मुहूर्त पर प्राण प्रतिष्ठा करें। गंगाजल/दूध/पंचामृत अभिषेक। ध्यान साधना/त्राटक में अत्यंत प्रभावशाली। मानसिक शांति, वास्तु दोष निवारण, ग्रह शांति।#स्फटिक#क्रिस्टल#शिवलिंग
पूजा विधि एवं कर्मकांडदंडवत प्रणाम कैसे करेंदंडवत प्रणाम में कमर से झुककर पेट के बल लेटें जिससे ठोड़ी, छाती, दोनों हाथ, दोनों घुटने और पाँव जमीन से स्पर्श करें। पेट जमीन से न लगे। इस मुद्रा में भगवान को समर्पण भाव से प्रणाम करें।#दंडवत प्रणाम#साष्टांग प्रणाम#प्रणाम विधि
पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में कितने प्रकार के नमस्कार होते हैंपूजा में एकांग, द्विअंग, त्र्यंग, चतुरंग, पंचांग और साष्टांग (अष्टांग) नमस्कार होते हैं। पंचांग प्रणाम स्त्रियों के लिए और साष्टांग प्रणाम पुरुषों के लिए सर्वोत्तम माना गया है।#नमस्कार के प्रकार#पूजा विधि#प्रणाम
पूजा विधि एवं कर्मकांडआचमन का मंत्र क्या है?आचमन में तीन बार जल ग्रहण करते हुए क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः', 'ॐ माधवाय नमः' बोला जाता है। इससे पूर्व 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र से पवित्रीकरण होता है। यह पूजा आरंभ की अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।#आचमन मंत्र#पूजा विधि#शुद्धि मंत्र
पूजा नियमपूजा घर में सरसों तेल का दीपक जलाएं या घी का?नित्य पूजा में गाय के घी का दीपक सर्वश्रेष्ठ है। शनिदेव, हनुमान जी की पूजा में सरसों तेल का दीपक विशेष शुभ है। दोनों शुभ हैं, पर घी सात्विक और सर्वोत्तम माना जाता है।#दीपक#घी दीपक#सरसों तेल दीपक
षोडशोपचार पूजाषोडशोपचार पूजा क्या है?षोडशोपचार पूजा = 16 उपचारों से की जाने वाली पूजा: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल और प्रदक्षिणा/नमस्कार।#षोडशोपचार#सोलह उपचार#पूजा विधि
षोडशोपचार पूजनपारद शिवलिंग की पूजा किस विधि से करनी चाहिए?पारद शिवलिंग की पूजा षोडशोपचार (16 उपचार) विधि से करनी चाहिए — ध्यानम्, आवाहनम्, पाद्यम्, अर्घ्यम्, स्नानम्, गंध, पुष्प, बिल्वपत्र, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूलम् और क्षमा प्रार्थना।#षोडशोपचार#सोलह उपचार#पूजा विधि
पूजा विधिशिव-नाग पूजा में आवाहन कैसे करते हैं?शिव आवाहन: 'ॐ नमः शिवाय' से शिवलिंग पर; नाग आवाहन: चांदी के नाग-नागिन जोड़े को शिवलिंग के समक्ष रखकर नवनाग स्तोत्र से 'ॐ नवनागदेवताभ्यो नमः, आवाहयामि स्थापयामि।'#आवाहन#शिव आवाहन#नाग आवाहन
पूजा विधिकालसर्प शांति पूजा में नाग-नागिन की प्रतिमा क्यों रखते हैं?नाग-नागिन प्रतिमा इसलिए रखते हैं क्योंकि शास्त्र जीवित नाग की नहीं बल्कि भगवान शंकर के आभूषण के रूप में प्रतिमा की पूजा का निर्देश देते हैं — यही सात्त्विक और कल्याणकारी विधि है।#नाग नागिन प्रतिमा#चांदी#पूजा विधि
पूजा विधि और अनुष्ठानषोडशोपचार पूजन क्या होता है?षोडशोपचार पूजन 16 उपचारों वाली पूजा विधि है जिसमें आसन, अर्घ्य, चंदन, पुष्प, दीप, नैवेद्य, स्तोत्र पाठ, आरती और समर्पण सहित सभी चरण शामिल हैं।#षोडशोपचार#सोलह उपचार#पूजा विधि
पूजा विधि और अनुष्ठानअर्धनारीश्वर पूजा में देवी भाग पर क्या लगाते हैं?अर्धनारीश्वर पूजा में देवी भाग (बायाँ) पर कुमकुम या रक्त चंदन अनामिका से लगाते हैं — यह सौंदर्य और सृजन ऊर्जा का प्रतीक है।#देवी भाग#कुमकुम#रक्त चंदन
पूजा विधि और अनुष्ठानअर्धनारीश्वर पूजा में शिव भाग पर क्या लगाते हैं?अर्धनारीश्वर पूजा में शिव भाग (दाहिना) पर भस्म या श्वेत चंदन अनामिका से लगाते हैं — यह वैराग्य का प्रतीक है।#शिव भाग#भस्म#श्वेत चंदन
पूजा विधि और अनुष्ठानअर्धनारीश्वर पूजा में संकल्प कैसे लेते हैं?पूजा में पहले जल लेकर जप संख्या और उद्देश्य का संकल्प लें, फिर ऋषि-छंद-देवता का विनियोग करें और अर्धनारीश्वर का ध्यान व आवाहन करें।#संकल्प#विनियोग#अनुष्ठान
दक्षिणामूर्ति साधनापूजा के आचमन मंत्र क्या हैं?आचमन मंत्र: 'ऐं आत्म तत्वाय स्वाहा', 'क्लीं विद्या तत्वाय स्वाहा', और 'सौः शिव तत्वाय स्वाहा' हैं।#आचमन मंत्र#शुद्धि#पूजा विधि
भूतनाथ मंत्र साधनाभैरव जी की सरल पूजा विधि क्या है?16 उपचारों (षोडशोपचार) से विधिवत पूजन, आवाहन और नैवेद्य अर्पण ही उनकी सरल विधि है।#पूजा विधि#षोडशोपचार#भैरव
पूजा विधिवरूथिनी एकादशी की पूजा विधि क्या है?दशमी के दिन सात्विक भोजन कर ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी की सुबह नहाकर पीले कपड़े पहनें और संकल्प लें। भगवान की पूजा में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं। दिन भर फलाहार कर रात में भजन-कीर्तन करें।#पूजा विधि#दशमी नियम#तुलसी दल
पूजा विधिमासिक कालाष्टमी की पूजा विधि क्या है?शाम या मध्यरात्रि में भगवान भैरव की प्रतिमा के सामने संकल्प लें। उन्हें स्नान कराकर चंदन या भस्म लगाएं। लाल फूल चढ़ाकर, सरसों के तेल का दीपक जलाएं, भोग लगाएं और अंत में आरती करें।#पूजा विधि#संकल्प मंत्र#षोडशोपचार
पूजा विधिमासिक दुर्गाष्टमी की सुबह की पूजा विधि क्या है?सुबह तिल के जल से स्नान कर लाल कपड़े पहनें। "श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं मासिक दुर्गाष्टमी व्रतं अहं करिष्ये" बोलकर संकल्प लें। माता की मूर्ति स्थापित कर गणेश पूजन के बाद माता को पंचामृत से स्नान कराएं और सुहाग सामग्री चढ़ाएं।#पूजा विधि#संकल्प मंत्र#षोडश मातृका
पूजा विधिसत्यनारायण पूजा का संकल्प कैसे लें? (मंत्र सहित)हाथ में जल, चावल और फूल लेकर भगवान का ध्यान करें और मंत्र बोलें: "मम सर्व पाप क्षय पूर्वकं... श्री सत्यनारायण देवता प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।" फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।#संकल्प मंत्र#पूजा विधि#काम्य कर्म
पूजा विधिशनिवार व्रत की पूजा विधि और संकल्प मंत्र क्या है?शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पर शनि देव (सुपारी/यंत्र) स्थापित करें। संकल्प लें, सरसों का तेल चढ़ाएं, अपराजिता/शमी के फूल चढ़ाकर उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं और दीपक जलाएं।#पूजा विधि#संकल्प मंत्र#तैलभ्यंग
पूजा विधिशनिवार काली पूजा की विधि क्या है?काले कपड़े पहनें, शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं। घर आकर माता के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं (जिसमें काले तिल और लौंग हों), लाल फूल चढ़ाएं और चालीसा पढ़ें।#पूजा विधि#दीपक#सरसों का तेल
पूजा विधिसंकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे करें?शाम को गणेश जी की स्थापना कर पंचामृत से स्नान कराएं। फिर लाल चंदन, लाल फूल, 21 दूर्वा और 21 मोदक चढ़ाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें और आरती करें।#पूजा विधि#कलश स्थापना#21 दूर्वा
पूजा विधिशनिवार व्रत की पूजा कैसे करें?पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पहनकर पूजा करें। शनि देव को सरसों का तेल, नीले फूल, काले तिल और उड़द की दाल का भोग लगाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।#पूजा विधि#सरसों का तेल#लोहे की कील
पूजा विधिवैभव लक्ष्मी व्रत की पूजा कैसे करें?लाल कपड़ा बिछाकर चावल की ढेरी पर कलश रखें। कलश के ऊपर कटोरी में सिक्का और पीछे श्रीयंत्र रखें। कुमकुम, चंदन लगाकर लाल फूल चढ़ाएं और कथा पढ़ें।#पूजा विधि#कलश स्थापना#लाल कपड़ा
पूजा विधिसंतोषी माता व्रत की पूजा कैसे करें?शुक्रवार को कलश स्थापित कर गुड़ और चने का भोग लगाएं। माता की कथा पढ़ें और आरती करें। यह बहुत सरल पूजा है जिसमें किसी मंत्र या पंडित की आवश्यकता नहीं होती।#पूजा विधि#घरेलू धर्म#सरल पूजा
पूजा विधिगुरुवार व्रत की पूजा कैसे करें?पीले कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और केले के पेड़ की स्थापना करें। हल्दी-चंदन का तिलक लगाकर पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और जल अर्पित करें। अंत में बेसन का भोग लगाकर कथा और आरती करें।#पूजा विधि#केले की पूजा#कलश स्थापना
पूजा विधिबुधवार व्रत की पूजा कैसे करें?ईशान कोण में कलश और गणेश जी की स्थापना कर पंचामृत से स्नान कराएं। गणेश जी को लाल चंदन, सिंदूर, 21 दूर्वा और मोदक चढ़ाएं तथा बुध देव को हरा कपड़ा और मूंग का हलवा अर्पित कर आरती करें।#पूजा विधि#कलश स्थापना#षोडशोपचार
पूजा विधिमंगलवार व्रत की पूजा कैसे करते हैं?ईशान कोण में लाल कपड़ा बिछाकर राम-सीता और हनुमान जी की मूर्ति रखें। संकल्प लेकर पंचामृत से स्नान कराएं, चोला चढ़ाएं, लाल फूल और तुलसी दल अर्पित करें और गुड़-गेहूं या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।#पूजा विधि#षोडशोपचार#कलश स्थापना
पूजा विधान और नियमपिंगलेश्वर शिवलिंग की शास्त्रसम्मत अभिषेक और पूजा विधि क्या है?सर्वप्रथम पंचास्य विनायक की पूजा कर शिवलिंग का गंगाजल, गोदुग्ध, घी, शहद और भस्म से अभिषेक किया जाता है। फिर बिल्वपत्र, धतूरा, श्वेत अर्क के पुष्प, भांग और रुद्राक्ष अर्पित किए जाते हैं।#षोडशोपचार पूजा#अभिषेक#पार्थिव लिंग पूजन
हिंदू पूजा पद्धतिघनकर्णेश्वर महादेव की पूजा विधि और अभिषेक कैसे करें?पहले घंटाकर्ण हृद में स्नान — फिर ध्यान, आवाहन, पाद्य-अर्घ्य, गोदुग्ध अभिषेक (रुद्र सूक्त सहित), भस्म-बिल्वपत्र, महा-आरती। विशेष — मौन और नाद-श्रवण पर बल, अधिक बोलना वर्जित।#घनकर्णेश्वर#पूजा विधि#अभिषेक
गृह आचार एवं पूजा विधितुलसी की परिक्रमा कैसे करें?दाहिनी ओर से (clockwise) तीन परिक्रमाएं करें, मंत्र बोलें। रविवार और एकादशी को तुलसी का स्पर्श वर्जित है।#तुलसी#परिक्रमा#पूजा विधि
दैनिक आचरण एवं संस्कारतुलसी को जल चढ़ाने का समयतुलसी को जल देने का सर्वोत्तम समय सुबह स्नान के बाद सूर्योदय के समय है। रविवार, एकादशी, ग्रहण काल और सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं देना चाहिए।#तुलसी पूजा#तुलसी जल#विष्णु प्रिया
व्रत एवं त्योहारकरवाचौथ में चाँद देखने के बाद क्या करें?चाँद उगने पर छलनी से पहले चंद्रमा देखें, फिर पति का मुख। करवे से चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें। पति के पैर छूएं, उनके हाथ से जल पिएं और प्रसाद ग्रहण करें — इससे व्रत का पारण होता है।#करवाचौथ#चाँद अर्घ्य#व्रत पारण
पूजा विधि एवं नियमपूजा में शंख बजाने की सही विधि क्या है?पूजा में शंख बजाने से पहले विष्णु का ध्यान करें, फिर एक बार में तीन बार बजाएं। शिव पूजा में शंख न बजाएं। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख का उपयोग करें।#शंख#शंखनाद#पूजा विधि
पूजा विधि एवं नियमपंचामृत अभिषेक के बाद क्या करें?अभिषेक के बाद मूर्ति को गंगाजल से धोएं, पोंछें और पुनः पूजन करें। पंचामृत को दोनों हाथों में लेकर शीश से लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और भक्तों में वितरित करें। इसे नाली में न बहाएं।#पंचामृत#अभिषेक#प्रसाद
पूजा एवं अनुष्ठानप्रसाद में नारियल कैसे तोड़ें शुभ तरीकानारियल को पहले भगवान को अर्पित करें, फिर हाथ जोड़ें। एक ही वार में मजबूती से तोड़ें। अंदर से सफेद-स्वच्छ निकले तो शुभ है। प्रसाद सभी में बाँटें।#नारियल#प्रसाद#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानचरणामृत कैसे बनाएं कितना पिएंतांबे के पात्र में जल, गंगाजल, तुलसी, चंदन और अक्षत मिलाकर भगवान के चरण धोएं — यह चरणामृत है। दाएं हाथ में तीन बार लेकर, पहले सिर से लगाकर फिर पिएं।#चरणामृत#प्रसाद#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानपूजा थाली में क्या क्या सामान रखें पूरी सूचीपूजा थाली में — आचमनी (जल+तुलसी), अक्षत, रोली, चंदन, कुमकुम, पुष्प, धूप-दीप, कपूर, भोग, पान-सुपारी, घंटी, मौली और दक्षिणा रखें। पंचामृत अलग से तैयार रखें।#पूजा थाली#पूजा सामग्री#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानविसर्जन मंत्र क्या है पूजा अंत में कैसे बोलेंपूजा अंत में पहले क्षमायाचना करें — 'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्...' फिर विसर्जन मंत्र — 'गच्छ गच्छ परं स्थानं...' बोलकर पूजा संपन्न करें।#विसर्जन#मंत्र#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानआवाहन मंत्र क्या है भगवान को कैसे बुलाएंआवाहन मंत्र है — 'ॐ आगच्छ आगच्छ देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहः। क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तम। आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि।।' — हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर देवता का ध्यान करते हुए बोलें।#आवाहन#मंत्र#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानपंचोपचार पूजा में 5 उपचार कौन सेपंचोपचार के पाँच उपचार हैं — गंध (चंदन/रोली), पुष्प (फूल), धूप (अगरबत्ती), दीप (दीपक) और नैवेद्य (भोग/प्रसाद)। यह दैनिक पूजा की सरल और पूर्ण विधि है।#पंचोपचार#5 उपचार#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानषोडशोपचार पूजा में 16 उपचार कौन सेषोडशोपचार के 16 उपचार हैं — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, आरती और मंत्रपुष्पांजलि-प्रदक्षिणा।#षोडशोपचार#16 उपचार#पूजा विधि
पूजा एवं अनुष्ठानपूजा में कलश आम पत्ता नारियल क्यों रखते हैंकलश में सभी तीर्थों का आह्वान होता है, आम के पत्ते देवांगों और समृद्धि के प्रतीक हैं, और नारियल त्रिदेवों का प्रतीक 'श्रीफल' है। तीनों मिलकर पूर्ण देवत्व का आह्वान करते हैं।#कलश#आम पत्ता#नारियल
पूजा एवं अनुष्ठानपूजा में आसन शुद्धि कैसे करें मंत्रआसन पर बैठते समय 'ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका...' मंत्र से आसन-शुद्धि करें। इसके बाद 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र से जल छिड़ककर स्वयं और पूजा सामग्री को शुद्ध करें।#आसन शुद्धि#पूजा विधि#मंत्र
पूजा एवं अनुष्ठानप्राणायाम पूजा से पहले क्यों करते हैं विधिपूजा से पहले प्राणायाम इसलिए करते हैं ताकि मन एकाग्र हो, नाड़ियाँ शुद्ध हों और मंत्रोच्चारण में पवित्रता आए। तीन से पाँच बार नाड़ीशोधन प्राणायाम पर्याप्त है।#प्राणायाम#पूजा विधि#शुद्धि
पूजा एवं अनुष्ठानआचमन कैसे करें कितनी बार जल पिएंतांबे के पात्र से तुलसी-युक्त जल लेकर तीन बार आचमन करें — पहले 'ॐ केशवाय नमः', दूसरे 'ॐ नारायणाय नमः', तीसरे 'ॐ माधवाय नमः' बोलते हुए। हथेली गाय के कान जैसी बनाएं, जल कंठ तक जाए।#आचमन#पूजा विधि#शुद्धि