विस्तृत उत्तर
पूजा के अंत में देवता को विसर्जित करने की विधि भी उतनी ही आवश्यक है जितना आवाहन। विसर्जन का अर्थ है — पूजा समाप्त होने पर देवता को अपने धाम को प्रस्थान करने की विनम्र प्रार्थना करना।
विसर्जन से पहले क्षमायाचना मंत्र बोलें —
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर।।'
अर्थ — हे परमेश्वर! मुझे न आवाहन विधि ज्ञात है, न विसर्जन। पूजा-विधान भी मुझे भलीभांति नहीं आती। कृपया मुझे क्षमा करें।
इसके बाद विसर्जन मंत्र बोलें —
गच्छ गच्छ परं स्थानं स्वस्थाने परमेश्वर।
यत्र ब्रह्मादयो देवाः तत्र गच्छ हरे हर।
पुनरागमनाय च।।'
अर्थ — हे परमेश्वर, उस परमधाम को पधारें जहाँ ब्रह्मा आदि देव विराजते हैं। और पुनः पधारने के लिए (आशीर्वाद दें)।
पूजा के अंत में 'पुनरागमनाय च' बोलकर देवता की कृपा-उपस्थिति सर्वदा बनी रहने की प्रार्थना की जाती है।





