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चरणामृत कैसे बनाएं कितना पिएं?

तांबे के पात्र में जल, गंगाजल, तुलसी, चंदन और अक्षत मिलाकर भगवान के चरण धोएं — यह चरणामृत है।

संक्षिप्त उत्तर

तांबे के पात्र में जल, गंगाजल, तुलसी, चंदन और अक्षत मिलाकर भगवान के चरण धोएं — यह चरणामृत है। दाएं हाथ में तीन बार लेकर, पहले सिर से लगाकर फिर पिएं।

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विस्तृत उत्तर

चरणामृत वह पवित्र जल है जिससे भगवान के चरण (पाद्य) धोए जाते हैं। 'चरण' अर्थात चरण और 'अमृत' अर्थात अमृत — यह देवता के चरण-स्पर्श से पवित्र जल है जिसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है।

चरणामृत बनाने की विधि — तांबे के पात्र में शुद्ध जल लें। इसमें थोड़ा गंगाजल, तुलसी के पत्ते, चंदन, अक्षत और थोड़ा पंचामृत मिलाएं। इस जल से भगवान की मूर्ति के चरण धोएं — यही चरणामृत बनता है। वैकल्पिक रूप से शालिग्राम या भगवान की मूर्ति को इस जल में रखने से भी चरणामृत बनता है।

कुछ परंपराओं में चरणामृत और पंचामृत को एक ही माना जाता है, किंतु शास्त्रतः दोनों अलग हैं — पंचामृत पाँच वस्तुओं का मिश्रण है और चरणामृत देवता के चरण धोने वाला जल है।

कितना पिएं — चरणामृत हमेशा दाएं हाथ में लेकर, बाएं हाथ को नीचे रखकर ग्रहण करें। तीन बार लेकर पिएं — पहले सिर से लगाएं फिर पिएं। तांबे के चम्मच या आचमनी से देना उचित है।

शास्त्रों में कहा गया है — 'अकाल मृत्यु हरणं सर्व-व्याधि-विनाशनम्। विष्णोः पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते।।' — विष्णु का चरणामृत पीने से अकाल मृत्यु और सभी रोग नष्ट होते हैं।

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